नमस्कार दोस्तों,
मैं एक भारतीय एक्स मुस्लिम के रूप में आज फिर उन ताकतों को बेनकाब कर रहा हूँ जो 1000 साल पुराने आक्रमणों को भी “अमन” का प्रचार बनाकर हिंदू समाज की वीरगाथा को धूल में मिलाना चाहते हैं। 5 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में भारतेंदु नाट्य अकादमी के 50 वर्ष पूर्ण समारोह में जो बात कही, वो सच्चा इतिहास था। लेकिन AIMIM के यूपी प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली का मजहब बिलबिलाने लगा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी को “अमन पसंद” बता दिया और महाराजा सुहेलदेव को अपमानित करने की कोशिश की।
ये कोई नया बयान नहीं है। सितंबर 2025 में भी उन्होंने महाराजा सुहेलदेव को “लुटेरा” और सालार को “अमन पसंद” कहा था, जिस पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में FIR दर्ज हुई थी। फिर भी शौकत अली नहीं रुके।
योगी का बयान – सच्चाई जो इस्लामी तुष्टिकरण को चुभती है
सीएम योगी ने साफ कहा:
“जो माफिया अभी मिट्टी में मिले हैं, उन्हीं का एक रूप था सालार मसूद। उसने सोमनाथ मंदिर तोड़ा, अयोध्या की राम जन्मभूमि को भी क्षति पहुँचाई। महाराजा सुहेलदेव ने उसे न सिर्फ हराया, बल्कि ऐसी मौत दी जिसे इस्लाम में सबसे बुरी, जहन्नुम-गारंटी वाली मौत माना जाता है।”
ये कोई कल्पना नहीं। 1034 ईस्वी में महाराजा सुहेलदेव ने बहराइच के पास विदेशी आक्रांता सैयद सालार मसूद की सेना को करारी हार दी थी। सालार मसूद गजनी के सुल्तान महमूद गजनवी का भतीजा था। उसने हिंदुओं को जबरन इस्लाम कबूल करने को कहा। इनकार करने वालों के सिर काटे गए। हिंदू समाज में उसकी इतनी घृणा थी कि इस्लामी कट्टरपंथियों ने उसे “ग़ाज़ी” (इस्लाम के लिए लड़े योद्धा) का खिताब दे दिया।
ये “अमन पसंद” नहीं, खुला जिहादी आक्रमण था।
शौकत अली का एक्स पोस्ट – इतिहास का सफेदीकरण
शौकत अली ने लिखा:
“सालार मसूद गाजी A.R के बारे में गलत इतिहास बता रहे हैं हमारे मुख्यमन्त्री जी, अगर सालार मसूद ग़ाज़ी, लुटेरे होते अक्रान्ता होते, तो भारत के मुसलमानों के साथ साथ बड़ी तादाद में हमारे हिन्दू भाईयों की उनके प्रति आस्था ना होती, राजा सुहैल देव का भारत की आज़ादी, या भारत के निर्माण में कोई योगदान नहीं था यही सच्चाई है।”
मोमिनों, आस्था का नाम लेकर इतिहास को झुठलाना बंद करो!
मिरात-ए-मसूदी जैसी 17वीं सदी की किताब (घटना से 600 साल बाद लिखी गई) में सालार को सूफी-योद्धा बताया गया है। लेकिन असलियत ये है कि वो गजनवी लूटेरों का हिस्सा था। हिंदुओं की आस्था? वो डर और जबरन धर्मांतरण से पैदा हुई “आस्था” होती है, जो आज भी कई जगह दिखती है।
राजभर समाज का गुस्सा – जायज है
महाराजा सुहेलदेव राजभर समाज के कुलपुरुष हैं। पूर्वी UP में 18% आबादी राजभर की है। 15 जिलों की 60 विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव है। उनके लिए सुहेलदेव सिर्फ एक राजा नहीं, विदेशी आक्रांता के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक हैं।
पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने साफ कहा:
“अगर शौकत ने माफी नहीं माँगी तो प्रदेश भर में आंदोलन होगा। ओवैसी से कहूँगा कि अपने प्रदेश अध्यक्ष को माफी माँगने के लिए कहें, नहीं तो आपका निकलना दूभर हो जाएगा।”
10 जून 2026 को बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का मेला लगने जा रहा है। पहले यहाँ “लुटेरे ग़ाज़ी” का मेला लगता था। योगी सरकार ने 2025 में संभल में सैयद सालार का नेजा मेला बंद कर दिया। अब असली वीर का मेला लगेगा। यही तो “तुष्टिकरण का अंत” है।
सच्चाई जो शौकत-ओवैसी कभी नहीं मानेंगे
– सालार मसूद आक्रांता था।
– उसने मंदिर तोड़े, धर्मांतरण कराए, सिर कटवाए।
– महाराजा सुहेलदेव ने हिंदू-भारत की रक्षा की।
– आज AIMIM जैसे लोग इन्हीं आक्रांताओं को “अमन पसंद” बताकर वोट बैंक बचाना चाहते हैं।
ये वही मानसिकता है जो 1947 में पाकिस्तान बनवाने के बाद भी “भारत में रहकर हिंदू-मुस्लिम भाईचारा” का नाटक करती है। लेकिन जब हिंदू अपना इतिहास याद करते हैं तो “बिलबिलाहट” शुरू हो जाती है।
निष्कर्ष
भारत अब 2014 वाला भारत नहीं रहा। योगी राज में इतिहास को हिंदू-विरोधी चश्मे से नहीं देखा जाएगा। महाराजा सुहेलदेव जैसे वीरों का सम्मान होगा, आक्रांताओं का महिमामंडन नहीं।
शौकत अली, अगर सच में “अमन” पसंद हो तो इतिहास की किताबें पढ़ो। FIR तो पहले ही हो चुकी है। अब माफी माँग लो।
जय महाराजा सुहेलदेव।
(यह ब्लॉग ऐतिहासिक तथ्यों और हालिया घटनाओं पर आधारित है। तुष्टिकरण का अंत तभी होगा जब हम सच्चे इतिहास को स्वीकार करेंगे।)
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