भारत में शरिया कानून की शिफारिश: महाराष्ट्र की मुस्लिम विधायक सना मलिक की गैर संवैधानिक मांग

भारत में शरिया कानून की शिफारिश: महाराष्ट्र की मुस्लिम विधायक सना मलिक की गैर संवैधानिक मांग

नमस्कार दोस्तों,

मेरे लिए इस्लाम छोड़ने का फैसला आसान नहीं था। सालों की पढ़ाई, परिवार का प्रेशर, मुस्लिम समाज की दहशत और कुरान-हदीस की उन शिक्षाओं को देखते हुए जो महिलाओं, अल्पसंख्यकों और आलोचकों के साथ अन्याय को जायज ठहराती हैं—ये सब मेरी जिंदगी का हिस्सा रहे। लेकिन सच सामने आया तो चुप रहना नामुमकिन हो गया। आज जब महाराष्ट्र की NCP विधायक सना मलिक विधानसभा में खड़े होकर कुरान और शरिया कानून की मांग कर रही हैं, पाकिस्तान का उदाहरण दे रही हैं, तो मेरा खून खौल उठता है।

सना मलिक का बयान और हकीकत

सना मलिक ने तीन तलाक और बहुविवाह (चार शादी) के संदर्भ में कहा कि पाकिस्तान ने कुरान के नियमों को कानून बना लिया है, तो भारत को भी वैसा ही करना चाहिए। बाद में सफाई दी कि उनका मतलब कुछ और था, लेकिन वीडियो और सदन का रिकॉर्ड सब कुछ साफ है। नवाब मलिक की बेटी होने के नाते उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिला होगा, लेकिन सच तो ये है कि ये बयान भारतीय संविधान, समान नागरिक संहिता (UCC) और महिलाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है।

मैं पूछना चाहता हूं सना जी से—आपने कभी उन मुस्लिम महिलाओं की कहानियां पढ़ी हैं जिन्हें तीन तलाक देकर  रातोंरात सड़क पर फेंक दिया गया? जिनकी जिंदगी इसी चार शादी वाले अधिकार की वजह से जहन्नुम बन गई? पाकिस्तान का उदाहरण क्यों? वहां महिलाओं की हालत क्या है? अगर उदाहरण लेना है तो सीधे अफगानिस्तान से उदाहरण लीजिए जहां जिना के लिए पत्थर से मारकर मार डालने (राज्म) की सजा, छोटी छोटी बच्चियों का जबरन बचपन में ही बड़े मर्द से निकाह करवा देना, बच्चियों को पढ़ाई पर पाबंदी, चोरों को हाथ काटने की सजा, और अल्पसंख्यकों (हिंदू, ईसाई, अहमदी) पर जुल्म—ये सब कुरान-हदीस से प्रेरित हैं।

शरिया का असली चेहरा: मेरी कहानी

जब मैं मुसलमान था, तब मुझे सिखाया गया कि कुरान अंतिम सत्य है। सूरा 4:34 में पति को पत्नी को मारने की इजाजत, सूरा 4:3 में चार शादियां, विरासत में बेटी को आधा हिस्सा—ये सब “ईश्वरीय कानून” बताए जाते थे। लेकिन जब मैंने पढ़ा तो समझ आया: ये 7वीं सदी के अरब के जाहिल और बर्बर लोगों का नियम हैं, जो 21वीं सदी के भारत में लागू नहीं हो सकते।

महिलाओं को गवाही में आधा दर्जा, अपोस्टसी (इस्लाम छोड़ने) की सजा मौत, और जिहाद की अवधारणा—ये सब मुझे डराता था। लाखों एक्स मुस्लिम दुनिया भर में छिपकर जी रहे हैं क्योंकि शरिया उन्हें आजाद सोचने की इजाजत नहीं देता। भारत जैसे सेकुलर देश में शरिया की मांग करना न सिर्फ गैर-संवैधानिक है, बल्कि देश की एकता के लिए खतरा है।

UCC क्यों जरूरी है?

भारतीय संविधान सबको बराबर अधिकार देता है। समान नागरिक संहिता इसी का हिस्सा है। हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई—सभी के लिए एक कानून। सिर्फ मुस्लिम पर्सनल लॉ को छूट क्यों? तीन तलाक पर बैन लगा, लेकिन बहुविवाह अभी भी वैध है। ये महिलाओं के साथ अन्याय है।

पाकिस्तान, सऊदी, अफगानिस्तान—जहां शरिया है, वहां महिलाओं की स्थिति देख लीजिए। शिक्षा, आजादी, सम्मान—सब कुछ सीमित। भारत में रहकर पाकिस्तान मॉडल की तारीफ करना मतलब है कि आप इस देश की बहुलता और लोकतंत्र को स्वीकार नहीं करते।

एक्स मुस्लिम की अपील

मेरे जैसे हजारों लोग जो इस्लाम छोड़ चुके हैं, जानते हैं कि सच्ची आजादी बिना शरिया के ही मिलती है। सना मलिक जैसे नेताओं से कहना चाहता हूं—आप अपनी बेटियों के भविष्य के बारे में सोचिए। क्या आप चाहती हैं कि वे कुरान के नाम पर दूसरी पत्नी के आने का इंतजार करें? या तलाक का डर सहें?

भारत हिंदू बहुसंख्यक देश है, लेकिन ये सेकुलर है। यहां हर किसी को अपना धर्म मानने की आजादी है, लेकिन कानून सबके लिए एक होना चाहिए। शरिया की मांग करने वालों को याद रखना चाहिए: “भारत संविधान से चलेगा, कुरान या शरिया से नहीं।”

जय हिंद।

अगर आप भी एक्स मुस्लिम हैं या इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं, तो कमेंट में जरूर बताएं। सच बोलने का साहस हम सबको दिखाना होगा।

यह ब्लॉग मेरे व्यक्तिगत अनुभव और सार्वजनिक घटनाओं पर आधारित है।