आज ब्रिटेन की उस स्वतंत्र 219 पन्नों की ‘रेप गैंग इंक्वायरी रिपोर्ट‘ ने वही सच उजागर किया है जो दशकों से दबाया जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 2.5 लाख युवा मुख्यतः श्वेत ब्रिटिश लड़कियाँ दशकों से मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स का शिकार हुईं। 87% आरोपी मुस्लिम, मुख्य रूप से पाकिस्तानी मूल के। यह नेटवर्क 149 शहरों और स्थानीय प्रशासन क्षेत्रों में फैला हुआ था।
यह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर का संगठित यौन शोषण का नेटवर्क है जो 1950 के दशक से चला आ रहा है।
रिपोर्ट के मुख्य खुलासे
– आँकड़ों और गवाहियों की भाषा में
रिपोर्ट, जो ब्रिटेन के ग्रेट यारमाउथ से सांसद रुपर्ट लो के नेतृत्व में तैयार हुई, अदालती रिकॉर्ड, पीड़ितों की गवाहियाँ, विशेषज्ञ बयान और विभिन्न शहरों के साक्ष्यों पर आधारित है। इसमें बताया गया है:
– शिकार की उम्र और तरीका: 11 से 13 साल की मासूम लड़कियाँ – स्कूल के बाहर, केयर होम्स (बच्चों की देखभाल गृह) से या सड़कों पर टारगेट की जाती थीं। पहले दोस्ती, प्यार का जाल, उपहार, शराब, सिगरेट और ड्रग्स से फँसाया जाता। फिर टैक्सी, फ्लैट, होटल या रेस्टोरेंट में ले जाकर सामूहिक बलात्कार। लड़कियों को “passed around” यानी एक पुरुष से दूसरे, तीसरे, चौथे के बीच घुमाया जाता था।
– अतिरिक्त अत्याचार: वीडियो बनाकर ब्लैकमेल, गर्भवती कर जबरन अबॉर्शन, परिवार को नुकसान पहुँचाने की धमकियाँ, मारपीट। कई मामलों में लड़कियों को दूसरे शहरों में ले जाकर बेचा गया। कुछ पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया गया।
– अपराधियों की मानसिकता: पीड़िताओं ने बार-बार बताया कि उन्हें “व्हाइट ट्रैश” (सफेद कूड़ा) और “काफिर” कहकर अपमानित किया जाता था। काफिर शब्द मेरे लिए जाना-पहचाना है। इस्लामी शिक्षाओं में गैर-मुस्लिमों को हीन समझा जाता है। कुरान और हदीस में काफिर महिलाओं के साथ व्यवहार को “माल-ए-गनीमत” (युद्ध में लूटा हुआ माल) की तरह देखा जाता है। यही सोच इन गिरोहों को वैधता देती है।
– पृष्ठभूमि: ज्यादातर आरोपी पाकिस्तानी मुस्लिम समुदाय से। रिपोर्ट में स्पष्ट है कि 87% मुस्लिम थे। यह गैर-मुस्लिम लड़कियों को “हलाल” समझने की मानसिकता से जुड़ा है।
संस्थाओं की घोर विफलता – राजनीतिक करेक्टनेस का खूनी खेल
रिपोर्ट का सबसे गुस्सा पैदा करने वाला हिस्सा यह है कि पुलिस, सोशल सर्विसेज, स्कूल, अस्पताल और राजनेता सब कुछ जानते हुए चुप रहे। कारण? “रेसिज्म” या “इस्लामोफोबिया” का डर। मुस्लिम वोट बैंक, “कम्युनिटी कोहेसियन” (समुदाय की एकता) और मल्टीकल्चरलिज्म की आड़ में हजारों लड़कियाँ बर्बाद होती रहीं।
रोथरहम, रोचडेल, टेलफोर्ड, ऑक्सफोर्ड जैसे शहरों में पहले भी जाँचें हुईं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसे “आइसोलेटेड” बताकर दबाया गया। रिपोर्ट कहती है – यह कोऑर्डिनेटेड नेशनवाइड पैटर्न था।
एक्स मुस्लिम के नजरिए से
मैंने इस्लाम छोड़ा क्योंकि मैं सच के सामने झुकना नहीं चाहता था।
1. मज़हबी आधार: कुरान में सूरह अल-बकरा, सूरह अल-निसा आदि में काफिरों और गैर-मुस्लिम महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट है। हदीस में युद्धबंदियों (महिलाओं) के साथ व्यवहार के उदाहरण हैं। जब युवा मुस्लिम लड़के इन शिक्षाओं के साथ बड़े होते हैं और पश्चिमी “खुली” संस्कृति को कमजोरी समझते हैं, तो यही परिणाम निकलता है।
2. सांस्कृतिक कारक: पाकिस्तानी मुस्लिम समुदाय में मजबूत क्लैन सिस्टम और सुपीरियरिटी कॉम्प्लेक्स है। अपनी बेटियों की इज्जत को बाहरी लोगों से रक्षा की जाती है, लेकिन गैर-मुस्लिम लड़कियों को “आसान शिकार” माना जाता है, वो अलग बात है कि उन लड़कियों की इज्जत घर के ही अंदर लूट ली जाती हैं।
3. भारत और यूरोप का पैटर्न: ब्रिटेन में जो हो रहा है, भारत में **लव जिहाद** के रूप में दिखता है। कन्वर्जन, जबरन शादी, फिर शोषण। यूरोप के स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी में भी यही कहानियाँ दोहराई जा रही हैं।
2.5 लाख पीड़िताएँ – यह संख्या कल्पना नहीं, बल्कि एक्सट्रापोलेशन है विभिन्न शहरों की जाँचों (रोथरहम में 1400+, टेलफोर्ड में 1000+) से। कितनी जिंदगियाँ बर्बाद हुईं? कितनी लड़कियाँ आज भी PTSD, डिप्रेशन और आत्महत्या के कगार पर हैं?
अब क्या किया जाए? माँगें और समाधान
– पूर्ण पारदर्शिता: सभी डेटा Ethnicity और Religion के आधार पर रिकॉर्ड हों। राजनीतिक दबाव में छुपाना बंद हो।
– सख्त कानून: ऐसे गिरोहों पर डीपोर्टेशन, आजीवन कारावास, संपत्ति जब्ती। टैक्सी, केयर होम्स में सख्त चेकिंग।
– इस्लाम की खुल कर आलोचना: बिना डरे इस्लाम की आलोचना। मदरसों में सिखाई जाने वाली घृणा वाली शिक्षाओं पर रोक।
– पीड़िताओं का न्याय: मुआवजा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, अपराधियों का सार्वजनिक हिसाब।
– समाज का जागरण: मल्टीकल्चरलिज्म के नाम पर बच्चों की सुरक्षा को खतरे में न डालें।
मैंने इस्लाम छोड़कर शांति पाई क्योंकि मैंने सच को गले लगाया। आज यह रिपोर्ट हर ईमानदार मुस्लिम से पूछ रही है – क्या तुम्हारा मज़हब इन जघन्य अपराधों को रोकता है, या इन्हें बढ़ावा देते हैं?
जय हिंद , वंदे मातरम्
स्रोत: ब्रिटेन की Rape Gang Inquiry Report, 2026)





