गाजियाबाद की वह घटना पढ़कर मैं आज ये सोच रहा हूं कि आखिर कब ये बंद होगा है। 28 मई 2026, बकरीद के दिन, खोड़ा थाना क्षेत्र, नवनीत विहार में 17 साल के मासूम हिंदू लड़के सूर्या प्रताप चौहान को उसके मुस्लिम ‘दोस्तों’ ने बेरहमी से चाकू मारकर मार डाला। हमलावरों ने कहा था – “क्या तूने कभी बकरा हलाल होते देखा है? आज तुझे दिखाते हैं।” और फिर सूर्या की आंतें बाहर निकाल दीं।
यह कोई साधारण झगड़ा नहीं था। यह पुरानी रंजिश को बकरीद जैसे त्योहार पर मज़हबी रंग देकर बदला लेना था।
क्या हुआ था ठीक-ठीक?
सूर्या 11वीं का छात्र था। आठ महीने पहले असद नाम के लड़के से उसकी छोटी-सी लड़ाई हुई थी। बकरीद के दिन असद ने सूर्या को पार्टी के बहाने बुलाया। सूर्या अपने दोस्त आयुष और विक्की के साथ गया। वहाँ पहले से ही असद, नवाब, फरहान, आतिफ आदि 5-6 लड़के हथियार लेकर तैयार बैठे थे। उन्होंने सूर्या को घेरा, पूछा “बकरा हलाल देखा है?” और फिर चाकुओं से गोदना शुरू कर दिया। सूर्या अपनी जान बचाने के लिए चाकू लगे हुए स्थिति में ही भागा, लेकिन अस्पताल में 29 मई को उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, असद मुख्य आरोपी बाद में एनकाउंटर में मारा गया। FIR दर्ज हुई, इलाके में तनाव है, हिंदू संगठन बुलडोजर एक्शन की मांग कर रहे हैं।
एक्स मुस्लिम के नजरिए से सच्चाई
मैं बचपन में मस्जिद गया हूँ, ईद मनाई है। कुर्बानी का दिन किसी जानवर का कत्ल करके एक प्रकार की प्रैक्टिस की तरह होता है जैसे कि जब किसी इंसान के गले पर छुरी चलानी हो तो दिल न पसीजे। ये बचपन से हर मुस्लिम बच्चे को दिखाया जाता है।
कुछ लोग कहेंगे “ये व्यक्तिगत रंजिश थी”। लेकिन भाई, बकरीद के दिन “बकरा हलाल” कहकर चाकू चलाना व्यक्तिगत रंजिश कैसे हो गया? यह जिहादी मानसिकता का नमूना है। जहां हिंदू को “काफिर” समझकर या पुरानी बात को मज़हबी जंग बना दिया जाता है।
भारत में रहने वाले ज्यादातर मुसलमान ये करने की हिम्मत नहीं कर सकते हैं, लेकिन समस्या यह है कि बीच बीच में ऐसी घटनाएं बार बार हो रही है। मदरसों में, कुछ मस्जिदों में और सोशल मीडिया पर जो घृणा फैलाई जाती है, उसका नतीजा ऐसे हत्याकांड बनकर सामने आता है।
मैंने खुद देखा है – जब कोई मुसलमान हिंदू लड़की से शादी करता है तो “लव जिहाद” कहलाता है, लेकिन जब हिंदू लड़के को इस तरह मार दिया जाए तो “रंजिश” कह दिया जाता है। यह दोहरा मापदंड खत्म होना चाहिए।
हमें क्या करना चाहिए?
1. कानून का सख्ती से पालन: योगी सरकार ने अच्छा काम किया – गिरफ्तारियां हुईं, एनकाउंटर हुआ। लेकिन ऐसे मामलों में सिर्फ एक एनकाउंटर काफी नहीं। पूरे नेटवर्क की जांच होनी चाहिए।
2. मुस्लिम समाज में सुधार: एक्स मुस्लिम होने के नाते मैं अपील करता हूँ – अपने बच्चों को घृणा सिखाने वाले मौलवियों और यूट्यूबर्स से दूर रखें। “कुर्बानी” अगर देना है तो कोई।अपनी कीमती चीज की दे न कि जानवर या इंसान की।
3. हिंदू समाज: उनका गुस्सा जायज है। कानून और लोकतंत्र पर भरोसा रखें। लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रहें।अपने बेटे बेटियों को। इस्लाम के बारे में जागरूक करें और मुसलमानों से दूर रखें।
4. मीडिया और बुद्धिजीवियों: सेकुलर बनने के चक्कर में सच्चाई छिपाना बंद करें। केवल कुछ न्यूज चैनल और साइट्स ही ऐसे खबरों को दिखाती है इसीलिए ऐसी ब्लॉग को शेयर कीजिए क्योंकि मुख्यधारा के चैनल और अखबार ऐसी खबरों को अक्सर दबा देती है।
सूर्या जैसा मासूम बच्चा सिर्फ इसलिए मरा क्योंकि वह हिंदू था और बकरीद के दिन गलत जगह पर था। उसकी मां-बहन का दर्द कल्पना से परे है।
भारत हिंदू बहुल देश है। यहां सबको बराबर अधिकार है, लेकिन किसी को विशेषाधिकार नहीं। अगर हम सच्चे सेकुलरिज्म चाहते हैं तो इस्लामिक कट्टरपंथ की जड़ों को काटना होगा।
जय हिंद।
सूर्या की आत्मा को शांति मिले।
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