पाकिस्तान में अक्सर कश्मीर को लेकर जो तस्वीर पेश की जाती है, वह ‘मजलूम कश्मीरियों’ की होती है। लेकिन हाल ही में पाकिस्तान के एक बड़े देवबंदी मौलाना और इमरान खान के करीबी माने जाने वाले मुफ्ती सईद खान ने एक सार्वजनिक मंच से ऐसा खुलासा कर दिया, जिसने न सिर्फ पाकिस्तान की ‘जिहादी’ मानसिकता की पोल खोल दी, बल्कि यह भी बता दिया कि कश्मीर में तथाकथित ‘मुजाहिदीन’ असल में किस मानसिकता के साथ काम कर रहे थे।
यह बयान ‘कश्मीर एंड आवर हिपोक्रेसी’ (कश्मीर और हमारा पाखंड) नाम की एक सभा में दिया गया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मौलाना ने क्या कहा?
मंच पर बोलते हुए मुफ्ती सईद खान ने बताया कि कश्मीर में संघर्ष के दौरान तथाकथित ‘मुजाहिदीन’ (जिहादी) ने कश्मीरी लड़कियों के साथ कैसे जघन्य अपराध किए।
उन्होंने कहा:
“कश्मीर का मसला हमने कितना खुद बिगाड़ा है। सरदार… 20-25 वर्ष के लड़के थे… कश्मीर कमेटी के चेयरमैन थे। उन्होंने कहा कि कश्मीर की जब जंग छिड़ी तो खूबसूरत कश्मीरी लड़कियों के पास वो जाते थे और एक रोटी पर एक जवान लड़की को अपने पास ले आते। बहुत फक्र से वो ये बताते हैं। बड़ा अच्छा किस्सा उन्होंने अपनी जिंदगी का बताया है।”
मौलाना ने इस बात पर भी खेद व्यक्त किया कि इन घटनाओं को ‘फख्र’ (गर्व) के साथ याद किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कश्मीरियों के साथ ऐसा ‘जिहाद’ कैसे हो सकता है, जहां मासूम लड़कियों की इज्जत को रोटी के मोल तौला जा रहा हो।
जिहाद’ का चेहरा उजागर
भारत में इस्लामिक आलोचकों और खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि यह बयान पाकिस्तान के उस ‘जिहाद’ की असली मानसिकता को उजागर करता है, जिसे लंबे समय से कश्मीर में ‘आजादी की लड़ाई’ का नाम दिया जाता रहा है।
आइए जानते हैं कि इस बयान से कौन से कई पहलू उजागर होते हैं:
1. ‘जिहाद’ का व्यापारिक चेहरा
मौलाना ने जिस घटना का जिक्र किया, वह दिखाती है कि कश्मीर में घुसपैठ करने वाले या वहां पैदा हुए आतंकी भी सिर्फ ‘इस्लाम के नाम’ पर नहीं लड़ रहे थे। यहां महिलाओं को ‘युद्ध की लूट’ (ग़नीमत) समझा जाता था। “एक रोटी के बदले लड़की” यह वाक्य इस बात की तस्दीक करता है कि ये लोग न तो धर्म के ठेकेदार थे और न ही कश्मीरियों के हितैषी। यह उस विकृत मानसिकता का उदाहरण है जहां मासूमियत का शोषण सबसे सस्ते दाम पर किया गया।
2. देवबंदी विचारधारा का दोहरापन
मुफ्ती सईद खान खुद देवबंदी विचारधारा से ताल्लुक रखते हैं और इमरान खान के करीबी माने जाते हैं। देवबंदी स्कूल ऑफ थॉट को पाकिस्तान और भारत में सख्त सुन्नी विचारधारा के लिए जाना जाता है। यह बयान इस बात का सबूत है कि इन तथाकथित धर्मगुरुओं को भी अब यह एहसास हो रहा है कि उनकी नीतियों ने कश्मीर को कितना नुकसान पहुंचाया। लेकिन सवाल यह है कि इतने सालों तक यही लोग ‘मुजाहिदीन’ को फंड और मनोबल देते रहे, उन्हें ‘शहीद’ का दर्जा देते रहे।
3. कश्मीरियों का शोषण: पाकिस्तानी मूल की साजिश
इस बयान ने उस सच्चाई को उजागर किया है जिसे भारत हमेशा से उठाता रहा है कि पाकिस्तान ने कश्मीर को कभी अपना ‘ताज’ नहीं समझा, बल्कि उसे अपनी महत्वाकांक्षाओं का ईंधन बनाया। असली कश्मीरी (हिंदू, मुस्लिम, सिख) इस ‘जिहादी’ मानसिकता के शिकार हुए। कश्मीरी मुसलमानों को पाकिस्तानी आतंकियों ने ही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया — बलात्कार, लूटपाट और आतंक के जरिए उनकी जिंदगी बर्बाद की।
4. इमरान खान की ‘न्याय’ की पोल
मौलाना सईद खान को इमरान खान का करीबी बताया जाता है। इमरान खान जब सत्ता में थे, तो पूरी दुनिया में ‘कश्मीरियों के हक’ की बात करते थे। उनकी पार्टी और उनके करीबी मौलाना के इस बयान से साफ हो जाता है कि पाकिस्तानी सियासत कश्मीर को महज एक प्रोपेगंडा टूल के तौर पर इस्तेमाल करती थी। जब खुद उनके साथी ही मान रहे हैं कि कश्मीरी लड़कियों के साथ रोटी के बदले रेप किए जाते थे, तो इमरान खान की ‘इंसाफ’ की कहानी झूठी साबित होती है।
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट: ‘जिहाद’ का मानसिक पैटर्न
खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, यह बयान पाकिस्तान प्रायोजित ‘जिहाद’ के उस मानसिक पैटर्न को दिखाता है जहां:
· महिलाएं युद्ध सामग्री थीं: उन्हें संपत्ति समझा जाता था।
· मज़हब का दुरुपयोग: मज़हब के नाम पर यौन हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की गई।
· स्थानीय आबादी का उपयोग: कश्मीरी मुसलमानों को ढाल बनाकर उनकी ही बेटियों के साथ अत्याचार किए गए।
निष्कर्ष: कश्मीर की सच्चाई अब दुनिया के सामने
यह पहला मौका नहीं है जब किसी पाकिस्तानी मौलाना या नेता ने कश्मीर में ‘मुजाहिदीन’ के अत्याचारों को स्वीकार किया हो, लेकिन यह सबसे स्पष्ट और खुले मंच से दिया गया बयान है। मुफ्ती सईद खान ने ‘एक रोटी के बदले कश्मीरी लड़कियों’ वाली कहानी सुनाकर उस पाखंड को बेनकाब किया है, जिसे पाकिस्तान ‘कश्मीर की आजादी’ का नाम देता है।
भारतीय दृष्टिकोण से यह बयान इस बात का प्रमाण है कि अगर कश्मीर में कोई ‘मजलूम’ है, तो वह है वहां की महिलाएं और आम नागरिक, जिन्हें पाकिस्तानी आतंकियों और उनके संरक्षकों ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। मज़हब के नाम पर होने वाली इस क्रूरता का खुलासा अब खुद पाकिस्तान के मौलाना कर रहे हैं, तो यह समय है कि दुनिया इस ‘जिहादी’ विचारधारा को उसके असली रंग में पहचाने।





