हाल ही में दिल्ली के यूट्यूबर सलीम वास्तिक, जो खुद को ‘एक्स-मुस्लिम’ कहकर चर्चा में रहे, की गिरफ्तारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 25 अप्रैल 2026 को दिल्ली पुलिस ने उन्हें 1995 के मामले में गिरफ्तार किया, जिसमें 13 वर्षीय बच्चे संदीप का अपहरण और हत्या का आरोप था।
सलीम खान (उनका असली नाम) 26 साल तक फरार रहे। इस घटना ने दिखाया कि इंसान की जिंदगी कितनी जटिल हो सकती है – एक तरफ पुराना अपराध, दूसरी तरफ नई पहचान में इस्लाम जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर बोलना।
1995 की घटना: एक दुखद अध्याय
20 जनवरी 1995 को दिल्ली के कबूल नगर में 13 साल के संदीप स्कूल नहीं पहुंचे। परिवार ने तलाश की, फिर अपहरण की सूचना मिली। रंगदारी की मांग हुई, लेकिन जांच में सलीम खान का नाम सामने आया।
सलीम उस समय रामजस स्कूल में मार्शल आर्ट्स सिखाते थे और परिवार को जानते थे। पूछताछ में उन्होंने संदीप का शव मुस्तफाबाद के नाले से बरामद कराया। 1997 में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2011 में अपहरण और हत्या की सजा बरकरार रखी (रंगदारी का आरोप हटा दिया गया)।
यह एक परिवार के लिए बहुत बड़ा सदमा था। बच्चे की मौत कोई भी समाज स्वीकार नहीं कर सकता।
जमानत पर फरार और नई पहचान के साथ नई जिंदगी
2000 में दो हफ्ते की जमानत मिली, लेकिन सलीम सरेंडर नहीं हुए। वे अलग-अलग जगहों पर रहे, नाम बदलकर सलीम वास्तिक या सलीम अहमद बने। गाजियाबाद के लोनी में महिलाओं के कपड़ों की दुकान चलाई।
इसी दौरान उन्होंने यूट्यूब चैनल शुरू किया और खुद को सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पेश किया। उन्होंने इस्लाम की कुछ प्रथाओं पर सवाल उठाए, जैसे महिलाओं के अधिकार, हलाला, बहुविवाह और कुछ मजहबी कट्टरता। कई लोगों ने उनके काम को सराहा और उनकी आर्थिक मदद भी की। उन्होंने इस्लाम के खिलाफ खुल कर और मुखरता से सामना किया जिस कारण उनके कई कट्टर मुस्लिम दुश्मन बन गए थे और उनकी जान लेना चाहते थे।
फरवरी 2026 का जानलेवा हमला:
27 फरवरी 2026 को उनके घर पर दो लोगों ने जानलेवा हमला किया, जिसमें गर्दन पर गंभीर चोट आई। वे बच गए, लेकिन हफ्तों अस्पताल में रहे। हमलावरों को बाद में एनकाउंटर में मार गिराया गया।
यह हमला दुखद था। जाओ की इस्लाम की आलोचना करने की सजा के तौर पर दी गई थी। हमले के बाद ही पुलिस को उनकी पुरानी पहचान का पता चला और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब वे तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हैं।
निष्कर्ष: अतीत, वर्तमान और सीख
सलीम वास्तिक का मामला हमें कई बातें सिखाता है:
– अपराध चाहे कितना भी पुराना हो, न्याय व्यवस्था अंत में अपना काम करती है। बच्चे की हत्या एक गंभीर अपराध है, जिसकी सजा मिलनी ही चाहिए।
– इंसान अपनी जिन्दगी में कई बार ऐसे अपराध कर बैठता है जिसका पीछा खुद उसका कर्म करता है। लेकिन बाद के सालों में जो उन्होंने इस्लाम के खिलाफ काम किए है उसको भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
– उनके जो अपराध किए थे वो तब किए थे जब वो एक मुसलमान थे लेकिन इस्लाम छोड़ने के बाद उन्होंने सभी बुराइयों को छोड़ कर एक अच्छी जिंदगी जीने का प्रयास कर रहे थे।
– सलीम वास्तिक ने हमेशा ही ये बात कहते थे कि पहले वो एक बदमाश और आतंकी था जिससे लोग डरते थे उन्होंने कहा था कि पहले उन्होंने बहुत बुरे काम किए है। लेकिन जिस गुनाह के लिए उन्हें सजा मिली है और गिरफ्तारी हुई है उसको हमेशा से ही छुपाया।
हम न तो सलीम वास्तिक की तरफदारी करते हैं और न ही उनके आज के किरदार और उसकी मेहनत को नजरंदाज कर सकते हैं। यह एक जटिल मामला है जिसमें एक तरफ मासूम बच्चे की जान गई तो दूसरी तरफ एक व्यक्ति ने इस्लाम की हकीकत दुनिया के सामने उजागर किया है।
कानून अपना रास्ता ले चुका है। हमलोग इस घटना से बहुत कुछ सीख सकते हैं– (1) जैसे एक्स मुस्लिम भी अपराधी और उसका काला अतीत भी हो सकता है। (2) बड़ा से बड़ा अपराधी भी अपने जीवन को सुधार कर समाज में एक अच्छा जीवन जीने की कोशिश कर सकता है लेकिन अपने गुनाहों की सजा पूरी करने के बाद।





