कहानी: कोचिंग की दोस्ती से दुष्कर्म तक
यह घटना अजमेर (राजस्थान) की है — साल 2024 की। पीड़िता एक नाबालिग स्कूली छात्रा है, जो 11वीं कक्षा में पढ़ती थी और कोचिंग भी जाती थी। उसके साथ जो हुआ, वह आज के सोशल मीडिया ज़माने की सबसे ख़तरनाक चालों में से एक है — ‘ग्रूमिंग’ जिहाद (भरोसा जीतकर शिकार बनाना)।
घटनाक्रम, पुलिस की शिकायत और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, क़रीब-क़रीब ऐसे आगे बढ़ा:
अक्टूबर 2023 — पीड़िता की मुलाक़ात कोचिंग सेंटर में एक लड़की से हुई और दोनों में दोस्ती हो गई।
उस सहेली ने पीड़िता से कहा कि वह इंस्टाग्राम पर ‘इरफान’ नाम के एक लड़के से दोस्ती कर ले। पीड़िता ने पहले उसकी ID ब्लॉक कर दी थी, लेकिन सहेली के लगातार दबाव में दोबारा दोस्ती कर बैठी।
इरफान ने प्रेम-जाल बिछाया — भरोसा जीता, और धीरे-धीरे पीड़िता के इंस्टाग्राम का यूज़र-आईडी और पासवर्ड हासिल कर लिया।
फिर शुरू हुआ आतंक का खेल: उसके अकाउंट से दूसरी लड़कियों को अश्लील फोटो-मैसेज भेजे गए, कई लड़कियों के मैसेज अपने पास जमा कर लिए (ताकि भविष्य में उन्हें भी ब्लैकमेल किया जा सके), पीड़िता की फोटो मॉर्फ करके अश्लील बनाई गईं, और “न्यूड फोटो/क्लिप वायरल कर दूँगा” की धमकी देकर पैसे माँगे गए।
डर के मारे पीड़िता घर से चुपके-चुपके पैसे निकालकर देती रही (शिकायत में क़रीब 5 लाख रुपए तक की बात आई)।
मार्च 2024 — पैसे लेने आए इरफान ने दुष्कर्म किया। पिता की शिकायत के अनुसार मुख्य आरोपी और उसके पाँच साथियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और मोबाइल से वीडियो भी बनाई। इसके बाद और पैसे (क़रीब 10 लाख) की माँग हुई।
घर से नकदी गायब होने पर परिजनों ने पूछा तो टूट चुकी पीड़िता ने रोते हुए पूरी आपबीती बताई।
30 मई 2024 — पिता ने क्रिश्चियनगंज थाने में पॉक्सो एक्ट समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियाँ
पुलिस ने पहले इरफान और अरबाज़ को गिरफ्तार किया; साथ ही एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया।
अजमेर रेंज IG लता मनोज कुमार के निर्देश पर 17 पुलिसकर्मियों की SIT (विशेष जाँच दल) बनाई गई।
जाँच बढ़ने पर कुल 7 लोग गिरफ्तार हुए — जिसमें एक नाबालिग भी है। छह वयस्क आरोपियों के नाम: इरफान, अरबाज़, असलम, रज्जाक, मुबारक ख़ान और इमरान ख़ान।
एसपी देवेंद्र कुमार बिश्नोई ने कहा कि आरोपी संगठित गिरोह के रूप में काम करते हैं — इंस्टाग्राम से स्कूल-कोचिंग जाने वाली लड़कियों से दोस्ती कर उन्हें फँसाना इनका तरीका है।
पुलिस यह भी जाँच रही है कि क्या इन्होंने अन्य लड़कियों को भी निशाना बनाया है, और पीड़िता की उस सहेली की भूमिका क्या थी जिसने इरफान से मिलवाया।
कुछ रिपोर्ट्स में पुलिस सूत्रों के हवाले से ‘जेहादी मिशन’ जैसी आशंका की बात भी कही गई — जांच अभी जारी है। अंतिम फ़ैसला न्यायालय करेगा।
क्या यह नया मामला है?
नहीं ये मामला अकेला नहीं है
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह modus operandi नया नहीं है। कुछ रिपोर्टेड मामले:
1. अजमेर, मार्च 2022 — अरशद ख़ान कांड: 17 वर्षीय नाबालिग से सोशल मीडिया पर दोस्ती की, ब्लैकमेल किया, दोस्तों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर गला रेतकर हत्या कर दी। पुलिस ने अरशद ख़ान समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया। (स्रोत: OpIndia)
2. लखनऊ, अगस्त 2023 — ‘राहुल’ बनकर फँसाना: लखनऊ के रहीमाबाद थाने में एक लड़की ने शिकायत दी कि ‘इरफान’ नाम का युवक ‘राहुल’ नाम धारण कर हिंदू लड़की को फँसाने की कोशिश कर रहा था और उसकी निजी तस्वीरें वायरल कर दीं। (स्रोत: OpIndia) — ध्यान दें: नकली पहचान इस चाल की सबसे बड़ी ताक़त है।
3. धौलपुर (राजस्थान), मई 2024 — नाबालिग से दुष्कर्म, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल: ठीक उसी तरह की घटना — दुष्कर्म, फिल्माना और अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना। (स्रोत: ETV Bharat)
ऐतिहासिक संदर्भ — अजमेर 1992 सेक्स स्कैंडल: 1992 में भी अजमेर इसी तरह के दुष्कर्म-ब्लैकमेल नेटवर्क की ख़बरों से हिल गया था। BBC ने 2024 में उस केस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की — “Waiting 32 years for justice in an Indian rape case” — जिसमें दिखाया गया कि पीड़िताओं को दशकों तक न्याय का इंतज़ार करना पड़ा। यानी यह पैटर्न तीन दशकों से दोहराया जा रहा है, और हर बार शिकार वही होती हैं – कम उम्र की हिंदू बच्चियां और शिकारी वही- मुस्लिम मर्द
मुस्लिम जिहादियों की चाल समझिए — ताकि कोई न फँसे
ये मामले एक जैसी ‘स्क्रिप्ट’ पर चलते हैं। इसे पहचान लेना ही सबसे बड़ा बचाव है:
भरोसे का पुल: किसी जानने वाले (सहेली/दोस्त) के ज़रिए या नकली नाम/पहचान से संपर्क बनाया जाता है। कई बार धार्मिक या सामाजिक पहचान का दुरुपयोग करके भरोसा जीता जाता है — यह मुस्लिम अपराधियों की आम चाल है, जो अपनी सुविधा के लिए नाम और धर्म इस्तेमाल करते हैं।
गोपनीयता हथियाना: पासवर्ड, OTP, स्क्रीन-शॉट, निजी तस्वीरें — कुछ भी हासिल करना।
अश्लील तस्वीर बनाना: फोटो मॉर्फ करना, अश्लील फोटो / वीडियो बनाना, अश्लील चैट बनाना — डराने का हथियार तैयार करना।
ब्लैकमेल का चक्र: पहले छोटी माँग, फिर बड़ी; पहले पैसा, फिर शारीरिक शोषण; फिर दूसरे शिकार को लाने का दबाव, पहले एक अपराधी, फिर गिरोह। हर बार पीड़िता को लगता है कि एक बार और दे दूँ तो बात ख़त्म हो जाएगी — और हर बार माँग बढ़ती जाती है।
अलग-थलग करना: पीड़िता को शर्म और डर में रखा जाता है ताकि वह परिवार/पुलिस तक न पहुँचे।
सबसे ज़रूरी सबक: ब्लैकमेल का पहला जवाब डर नहीं, रिपोर्ट होना चाहिए। जितनी देर चुप रहोगे, उतना गहरा जाल बुनेगा।
साइबर क्राइम हेल्पलाइन: 1930 (राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल) और cybercrime.gov.in पर तुरंत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। व्हाट्सऐप/इंस्टाग्राम पर 1930 पर मैसेज भी किया जा सकता है।
माता-पिता और छात्राओं के लिए सुरक्षा-सुझाव
बच्चों के लिए सुझाव :
1. अपना पासवर्ड, OTP या निजी तस्वीरें किसी को न दें — चाहे वह कितना भी ‘अच्छा’ क्यों न लगे।
2. सोशल मीडिया पर प्राइवेसी सेटिंग्स सख्त रखें: अकाउंट प्राइवेट, टैगिंग बंद, लोकेशन शेयर न करें।
3. अजनबियों से दोस्ती के पीछे की मंशा पर शक करना गलत नहीं है।
4. कोई भी धमकी मिले → तुरंत परिवार को बताएँ। शर्मिंदगी का डर अपराधी का हथियार है, आपकी गलती नहीं। पीड़िता कभी दोषी नहीं होती — दोषी हमेशा अपराधी होता है।
5. सबूत (स्क्रीनशॉट, चैट) डिलीट न करें — रिपोर्टिंग के लिए वही सबसे मज़बूत चीज़ है।
अभिभावकों के लिए सुझाव:
1. बच्चों के सोशल मीडिया पर खुलकर बात करें — जासूसी नहीं, भरोसे का रिश्ता बनाएँ ताकि वे डर के पल में आपके पास आएँ।
2. अचानक घर से पैसों की कमी, बच्चे का गुमसुम/अवसाद में रहना, फ़ोन छुपाना — ये संकेत हों तो पूछें, टालें नहीं।
3. कोचिंग/स्कूल के दोस्तों के बारे में बेझिझक जानें।
निष्कर्ष
अजमेर की इस बेटी के साथ जो हुआ, वह किसी भी परिवार के लिए सबसे बुरा सपना है। लेकिन उसके दर्द का सही इस्तेमाल यही है कि हम पैटर्न सीखें — ताकि अगली बेटी इस जाल में न फँसे।
स्रोत
NDTV — Minor Schoolgirl Blackmailed, Gang-Raped In Rajasthan; 2 Arrested
ETV Bharat — 11वीं की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म, मुख्य आरोपी गिरफ्तार (अजमेर)
ETV Bharat — नाबालिग से दुष्कर्म, अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी (धौलपुर)
OpIndia — Ajmer: Arshad Khan befriends minor girl over social media, gang-rapes, slits throat (2022)
BBC — Waiting 32 years for justice in an Indian rape case (1992 अजमेर मामला)
अस्वीकरण: यह लेख रिपोर्टेड जानकारी पर आधारित है; सभी आरोप न्यायालय में विचाराधीन हैं। पीड़िता की पहचान की रक्षा के लिए उसका नाम या तस्वीर जानबूझकर नहीं दी गई है।





