चपरासी रहमान ने 3 बीवियों और अपने प्रेमिका के साथ मिलकर किया सरकारी खजाने में हेरफेर।

चपरासी रहमान ने 3 बीवियों और अपने प्रेमिका के साथ मिलकर किया सरकारी खजाने में हेरफेर।

नमस्कार दोस्तों,

मैं एक एक्स मुस्लिम हूँ। पिछले कई सालों से मैंने इस्लाम को नजदीक से देखा, पढ़ा और जीया है। आज जब उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में चपरासी इल्हाम-उर-रहमान शम्सी का 8 करोड़ से ज्यादा का घोटाला सामने आया है, तो दिल में सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि एक गहरी उदासी भी है। क्योंकि यह मामला सिर्फ एक चपरासी का भ्रष्टाचार नहीं है — यह उस संस्कृति और मज़हब का जीता-जागता नमूना है जो एक व्यक्ति को तीन-तीन बीवियाँ रखने की इजाजत देता है और फिर उसी को सरकारी खजाने को लूटने का मौका भी दे देता है।

क्या हुआ पीलीभीत में?

जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में तैनात चपरासी इल्हाम शम्सी ने आठ साल पहले खुद को वहाँ अटैच करा लिया। धीरे-धीरे उसने वेतन बिल, सैलरी टोकन और ट्रेजरी के कामों पर कब्जा जमा लिया। फर्जी शिक्षक, बाबू और ठेकेदार बनाकर सरकारी पैसे को अपने रिश्तेदारों और बीवियों के खातों में ट्रांसफर करता रहा। कुल 8 करोड़ 15 लाख रुपये से ज्यादा का गबन।

पुलिस ने अब उसकी दूसरी बीवी अजारा खान, तीसरी बीवी लुबना, साली, सास, रिश्तेदारों और प्रेमिकाओं को गिरफ्तार किया है। पहली बीवी पहले ही जेल हो चुकी थी। 53 बैंक खाते, 98 ट्रांजेक्शन, और पांच करोड़ से ज्यादा फ्रीज। पैसा फ्लैट, जमीन और ऐशो-आराम में उड़ाया गया।

बहुविवाह की “किताबी” इजाजत का असली चेहरा

कुरान (सूरा अन-निसा 4:3) में साफ लिखा है कि अगर न्याय कर सको तो चार बीवियाँ रख सकते हो। मुहम्मद साहब खुद कई महिलाओं से निकाह कर चुके थे। मुस्लिम समाज में इसे “सुन्नत” माना जाता है।

लेकिन हकीकत क्या है?
– एक चपरासी तीन बीवियाँ रखता है — अलग-अलग शहरों में।
– दूसरी बीवी कहती है कि उसे बाकी निकाहों की खबर ही नहीं थी।
– सारा पैसा इन बीवियों, साली-सास और प्रेमिकाओं के खातों में।
– एक सामान्य नौकरी करने वाला व्यक्ति इतना पैसा कहाँ से लाएगा? फर्जीवाड़े से।

यह कोई इंसानी कमजोरी नहीं, बल्कि एक व्यवस्था की कमजोरी है। जब मज़हब एक पुरुष को कई महिलाओं का “मालिक” बना देता है, तो लालच भी कई गुना बढ़ जाता है। जिम्मेदारी एक, लेकिन भोग कई। नतीजा — सरकारी खजाने पर डाका।

एक्स मुस्लिम होने के नाते मेरी बात

जब मैं मुस्लिम था, तब भी मैं सोचता था कि बहुविवाह क्यों? आज जब बाहर हूँ तो साफ दिखता है — यह पुरुष-प्रधान व्यवस्था को बनाए रखने का हथियार है। गरीब-गरीब मुस्लिम युवक भी सपना देखता है — “चार बीवियाँ, कई बच्चे, अल्लाह रिज़क देगा”। लेकिन रिज़क अल्लाह नहीं, बल्कि टैक्सपेयर्स का पैसा देता है।

पीलीभीत का यह मामला अकेला नहीं है। उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार — कई जगहों पर ऐसे स्कैम सामने आते रहते हैं जहाँ नाम मुस्लिम हैं और तरीका एक-सा — फर्जी बेनेफिशियरी, रिश्तेदारों के खाते, और “उम्माह” का नेटवर्क।

यह संयोग नहीं है। जब समुदाय शिक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के बजाय “तकिया” (धोखा) और रिश्तेदारवाद को बढ़ावा दे, तो ऐसे घोटाले स्वाभाविक हैं।

सवाल समय का

– क्या बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाना चाहिए?
– क्या मदरसों और मस्जिदों में नैतिकता की बातें सिर्फ हिंदुओं को मूर्ख बनाने के लिए होती हैं?
– क्या सरकारी नौकरियों में ऐसे लोगों की नियुक्ति और प्रमोशन पर नजर रखनी चाहिए?

अब तक 7 लोग जेल में हैं, 5 करोड़ फ्रीज हुए हैं, लेकिन पूरा नेटवर्क अभी भी जांच के दायरे में है। उम्मीद है कि पूरी सच्चाई सामने आएगी।

मैं एक एक्स मुस्लिम के रूप में कहता हूँ — इस्लाम सुधारने लायक नहीं रहा। इसे छोड़ना ही सबसे बड़ा सुधार है। लेकिन देश के स्तर पर कानून, शिक्षा और जवाबदेही का सख्त होना जरूरी है, वरना चपरासी रहमान जैसे सैकड़ों लोग सरकारी खजाने को “अल्लाह की देन” समझकर लूटते रहेंगे।

आपकी राय क्या है? कमेंट में जरूर बताएं। सच्चाई छिपाने से समस्या हल नहीं होती, बल्कि बढ़ती है।