मुहम्मद और उनका अल्लाह एक गंभीर गलती कर बैठे — वे यहूदियों द्वारा पूछे गए तीन सवालों को सही ढंग से समझ ही नहीं पाए। इसके बजाय उन्होंने अस्पष्ट, भ्रमित और गलत जवाब दिए।
मदीना के यहूदियों ने मक्का के मूर्तिपूजकों को तीन कठिन और चुनौतीपूर्ण सवाल भेजे थे, ताकि यह परखा जा सके कि मुहम्मद सच्चे पैगंबर हैं या नहीं। ये सवाल बाइबिल की किताब दानिय्येल (Book of Daniel) से चुने गए थे।
यहाँ हुआ क्या:
| क्रमांक | यहूदियों द्वारा पूछा गया सवाल | मुहम्मद/कुरान द्वारा दिया गया जवाब |
|---|---|---|
| 1 | “ईश्वर की आत्मा” (Holy Spirit / Ruach ha-Kodesh) के बारे में — दानिय्येल नबी के दर्शन के संदर्भ में | “रूह मेरे रब के आदेश से है और तुम्हें ज्ञान बहुत कम दिया गया है।” (कुरान 17:85) |
| 2 | किताब दानिय्येल में “दो सींगों वाले मेमने” (ram with two horns) के दर्शन के बारे में | मुहम्मद ने समझा कि यह सिकंदर महान (Alexander the Great) के बारे में है और धुल-क़रनैन की कहानी सुना दी |
| 3 | तीन युवा यहूदी विश्वासियों को आग की भट्टी में डालने की कहानी (दानिय्येल 3) | मुहम्मद ने इसे ईसाई किंवदंती “असहाब-ए-कह्फ़” (People of the Cave) समझ लिया |
तीन यहूदी सवालों की पृष्ठभूमि
यहूदियों ने ये सवाल जानबूझकर चुने थे क्योंकि ये उस समय यहूदी विद्वानों के बीच विवादास्पद मुद्दे थे। वे मानते थे कि अगर मुहम्मद सच्चे पैगंबर हैं और उन्हें अल्लाह की तरफ से वह्य (revelation) मिल रही है, तो वे इन सवालों का सही जवाब दे सकेंगे।
1. पहला सवाल: ईश्वर की आत्मा (कुरान 17:85)
मुख्य विवाद यह था कि दानिय्येल सच्चे नबी थे या नहीं। ईसाई उन्हें नबी मानते थे क्योंकि उन पर पवित्र आत्मा (Holy Spirit) के द्वारा दर्शन दिए गए थे। कई यहूदी विद्वान however, किताब दानिय्येल को “लिखी हुई पुस्तकें” (Ketuvim) में रखते थे, न कि “नबियों” (Nevi’im) में।
यहूदी मुहम्मद से “पवित्र आत्मा” (Ruach ha-Kodesh) और नबुव्वत के प्रमाण के बारे में पूछ रहे थे। मुहम्मद ने सवाल को गलत समझा और इसे सामान्य “मानवी आत्मा” समझकर अस्पष्ट जवाब दे दिया:
“वे तुमसे रूह के बारे में पूछते हैं। कह दो: रूह मेरे रब के आदेश से है और तुम्हें ज्ञान बहुत थोड़ा दिया गया है।” (कुरान 17:85)
2. दूसरा सवाल: दो सींगों वाला मेमना (धुल-क़रनैन)
यहूदियों ने किताब दानिय्येल में वर्णित “दो सींगों वाले मेमने” के दर्शन के बारे में पूछा था। इस दर्शन की व्याख्या बाइबिल में साफ़ दी गई है (मीडिया और फारस के राजाओं से संबंधित)।
मुहम्मद और उनका अल्लाह ने इसे पूरी तरह गलत समझ लिया। उन्होंने सोचा कि यहूदियों का इशारा सिकंदर महान की तरफ है, जो इतिहास में “दो सींगों वाला” (Dhul-Qarnayn) कहलाता था। नतीजतन, सूरह अल-कह्फ़ (आयत 83-98) में धुल-क़रनैन की कहानी बयान कर दी गई।
3. तीसरा सवाल: आग की भट्टी में तीन युवा यहूदी
यहूदियों ने तीन धार्मिक यहूदी युवाओं (शद्रक, मेशक और अबेद-nego) की कहानी के बारे में पूछा था, जिन्हें राजा नबूकदनेस्सर ने सोने की मूर्ति की पूजा न करने के कारण आग की भट्टी में डाला था, लेकिन ईश्वर ने उन्हें बचा लिया (दानिय्येल अध्याय 3)।
मुहम्मद ने इसे ईसाई किंवदंती “असहाब-ए-कह्फ़” (People of the Cave) समझ लिया — सात (या आठ, जिसमें कुत्ता भी शामिल) ईसाई युवाओं की कहानी जो सदियों तक गुफा में सोते रहे। यह कहानी यहूदी बाइबिल का हिस्सा नहीं थी और यहूदियों द्वारा अस्वीकार की जाती थी क्योंकि यह ईसाइयों की महिमा करती थी।
इसी भ्रम के कारण कुरान में उनके संख्या के बारे में अस्पष्ट जवाब दिया गया:
“कुछ कहेंगे वे तीन थे, चौथा उनका कुत्ता; कुछ कहेंगे पाँच थे, छठा उनका कुत्ता — अदृश्य की अटकल लगाते हुए; और कुछ कहेंगे सात थे और आठवाँ उनका कुत्ता। कह दो: मेरा रब उनकी संख्या को सबसे अच्छी तरह जानता है।” (कुरान 18:22)
मुहम्मद के जवाबों में मुख्य समस्याएँ
- सवालों को समझने में पूर्ण असफलता
- दो अलग-अलग कहानियों का मिश्रण
- अस्पष्ट और टालने वाले जवाब
- 15 दिनों की देरी — तफ़सीर तबरी के अनुसार मुहम्मद ने 15 दिन तक लोगों से जानकारी इकट्ठा की।
निष्कर्ष
मक्का के मूर्तिपूजकों या मदीना के यहूदियों में से कोई भी इन तीन जवाबों को सुनकर इस्लाम नहीं लाया। कुरान खुद गवाह है कि मुहम्मद ने कोई स्पष्ट चमत्कार नहीं दिखाया।
ये घटनाएँ strongly सुझाव देती हैं कि मुहम्मद को अल्लाह की तरफ से कोई सर्वज्ञानी वह्य नहीं मिल रही थी। बल्कि वे 15 दिनों तक लोगों से जानकारी इकट्ठा कर रहे थे, कहानियों में उलझ गए और फिर अस्पष्ट जवाब देकर दावा किया कि यह अल्लाह की तरफ से आया है।
तीन यहूदी सवालों को सही ढंग से समझने और जवाब देने में असफलता इस बात का एक और प्रमाण है कि मुहम्मद की पैगंबरी का दावा जानकार यहूदियों द्वारा परीक्षा में खरा नहीं उतरा।





