क्या हुआ था जब 2021 में पश्चिम बंगाल में लौटी थी टीएमसी की मुस्लिम तुष्टिकरण सरकार:15000+ हिंसा की घटनाएँ, 40000+ हिंदू शिकार और 7000+ महिलाओं पर अत्याचार

क्या हुआ था जब 2021 में पश्चिम बंगाल में लौटी थी टीएमसी की मुस्लिम तुष्टिकरण सरकार:15000+ हिंसा की घटनाएँ, 40000+ हिंदू शिकार और 7000+ महिलाओं पर अत्याचार

पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनावी नतीजों ने साफ कर दिया है कि आखिरकार जनता ने ‘दंगाई सरकार’ के खिलाफ आवाज उठा ही दी। लेकिन जैसे ही हम राहत की सांस ले रहे हैं, TMC के बौखलाए जिहादी गुंडे फिर से हिंसा पर उतर आए हैं। यह वही पार्टी है, जिसने 2021 में सत्ता लौटने पर बंगाल को खूनी तांडव का मैदान बना दिया था।

आज एक एक्स मुस्लिम होने के नाते मैं आपको उन 15,000 से अधिक हिंदुओं और भाजपा समर्थकों के ऊपर हिंसा की घटनाओं, 40,000 हिंदू शिकारों और 7,000 से अधिक हिंदू महिलाओं पर हुए अत्याचार की याद दिलाना चाहता हूँ। यह कोई आम राजनीतिक हिंसा नहीं थी, बल्कि यह ‘इस्लामी जिहाद’ था।

क्या हुआ था 2 मई 2021 को?

जैसे ही टीवी स्क्रीन पर TMC की जीत के आंकड़े आए, वैसे ही बंगाल के हर उस इलाके में आग लग गई, जहाँ हिंदू और भाजपा समर्थक रहते थे। यह कोई संयोग नहीं था। यह एक सुनियोजित स्क्रिप्ट थी। रिपोर्ट्स के अनुसार:

·  भाजपा समर्थकों की लाश पेड़ पर लटकता मिला।
· बच्चों के सामने माँ का कत्ल हुआ।
· माता-पिता के सामने बेटी से बलात्कार किया गया।

जब हम एक्स मुस्लिम की भूमिका से देखते हैं, तो यही वो तरीका है जो इस्लामी चरमपंथी दुनिया के दूसरे हिस्सों (पाकिस्तान, बांग्लादेश) में उन अल्पसंख्यकों के साथ करते हैं जो उनके सामने झुकने से इनकार कर देते हैं और पाकिस्तान बनने से पहले और बांग्लादेश बनने से पहले मुसलमानों की भीड़ ने हिंदुओं के साथ यही किया था। TMC का यही ‘वोट-बैंक’ है – वो ताकत जो ‘मुस्लिम मॉब’ के नाम से जानी जाती है।

जब ‘कानून’ की जगह ‘शासक का कानून’ बोला

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने अपनी 2021 की रिपोर्ट में साफ कहा था – राज्य में ‘कानून का शासन’ नहीं, बल्कि ‘शासक का कानून’ चल रहा है। इसका मतलब है ‘लाठी उसकी, भैंस हमारी’।

जब हजारों हिंदू महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हो रहा था, घर जल रहे थे, तब पुलिस मूकदर्शक थी। क्यों? क्योंकि उस समय सरकार का मुखिया वह महिला थी, जिसने कभी बांग्लादेशी घुसपैठियों को ‘वोट बैंक’ कहा और कभी दंगाइयों को ‘बेटा’। यह ‘लिंग आधारित दमन’ नहीं था, यह ‘मज़हब आधारित दमन’ था।

पलायन करते हिंदू और सन्न देश

जेपी नड्डा ने बताया था कि करीब 80,000 से 1,00,000 हिंदू परिवारों को पलायन करना पड़ा था। लोग असम के धुबरी जिले में झोपड़ियों में जा रहे थे। क्या यह 1947 का विभाजन था? नहीं, यह 2021 का बंगाल था, जिसे ‘दीदी’ नाम की मुस्लिम तुष्टिकरण क्वीन चला रही थी।

विश्व हिंदू परिषद के अनुसार, इन हमलों में सबसे ज्यादा नुकसान अनुसूचित जाति और जनजाति के हिंदुओं को हुआ। यानी, सबसे कमजोर वर्ग को सबसे ज्यादा सताया गया। यही इस्लामिक सोच की असली करुणा है? यही ‘सेक्युलरिज्म’ है?

अदालत का रुख: CBI जांच और सच्चाई

कोलकाता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। लेकिन TMC सरकार ने क्या किया? वह सुप्रीम कोर्ट गई – “हमें CBI क्यों जांच करने दे?” यानी वह चाहती थी कि उसके अपने थानों में जांच हो, जहाँ मुस्लिम हमलावर आराम से बैठे रहें।

अगर यह हिंसा किसी मुस्लिम समुदाय के ऊपर हुई होती, तो पूरी दुनिया के मानवाधिकार आयोग और संयुक्त राष्ट्र ने हल्ला मचा दिया होता। लेकिन जब हिंदू मरता है, तो मीडिया में ‘अपराध’ और ‘बदमाश’ शब्दों का इस्तेमाल होता है।

निष्कर्ष:

बंगाल में 2021 की घटनाएँ सिर्फ TMC की विफलता नहीं हैं, बल्कि वे इस बात का सबूत हैं कि जब किसी राज्य में मुस्लिम वोट बैंक के लालच में हिंदू-विरोधी नीतियां अपनाई जाती हैं, तो अंत परिणाम हमेशा ‘नरसंहार’ जैसा ही होता है।

चाहे वह बांग्लादेश हो (जहाँ हिंदू मंदिर जलाए जाते हैं), चाहे पाकिस्तान हो (जहाँ हिंदू लड़कियों का अपहरण होता है), और चाहे वह पश्चिम बंगाल हो (जहाँ ‘दीदी’ की गोद में बैठे जिहादी कौम हिंदुओं को निशाना बनाते हैं) – हर जगह की कहानी एक जैसी है।

2026 में बंगाल ने जागकर सही किया। लेकिन हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि 40,000+ हिंदू शिकार और 7000+ महिलाओं पर अत्याचार कोई आंकड़े नहीं हैं – यह बंगाल के इतिहास का काला अध्याय है, जिसे TMC और उसकी दोहरी नीति ने लिखा।

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