तोहा खालसा का जौहर: जब 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने कुएँ में कूदकर ‘मुस्लिम हुए बिना’ मरना चुना एक

भूमिका: एक खूनी सवेरा जिसे हम भूल गए 1947 का बँटवारा भारतीय इतिहास का वह ज़ख्म है जो आज भी हर साल अगस्त में कराहता है। लेकिन हमारी “सेक्युलर” किताबों और “वामपंथी” इतिहासकारों ने एक चीज़ हमेशा छुपाई—या कम-से-कम धुँधली कर दी—कि उस खून-खराबे में सबसे ज़्यादा कौन मारा गया, और किसने किसको मारा। रावलपिंडी […]