8 साल की दलित बच्ची से रेप के मुख्य आरोपी फरमान पर सख्त एक्शन; 8 घंटे में घर पर बुलडोजर, UP पुलिस छापेमारी में जुटी

8 साल की दलित बच्ची से रेप के मुख्य आरोपी फरमान पर सख्त एक्शन; 8 घंटे में घर पर बुलडोजर, UP पुलिस छापेमारी में जुटी

आज जब उत्तर प्रदेश के अमरोहा में 8 साल की एक निर्दोष दलित बच्ची के साथ फरमान नाम के व्यक्ति ने जो जघन्य अपराध किया,फिर उसके बाद सरकार के द्वारा उसके घर पर बुलडोजर चलाया गया – तो मन में एक साथ कई भाव आए। गुस्सा, दुख और उम्मीद।

घटना क्या हुई?

8 जून 2026 की रात। अमरोहा के रहरा थाना क्षेत्र के मदारिपुर गांव में 8 वर्षीय एक दलित बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी। फरमान अली नाम के व्यक्ति ने उसे बहला-फुसलाकर खेत में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची खून से लथपथ घर पहुंची। पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज की – BNS, POCSO और SC/ST एक्ट के तहत। आरोपी फरार हो गया।

फिर जो हुआ, वो UP की ‘बुलडोजर न्याय’ की मिसाल है। मात्र कुछ घंटों में प्रशासन ने आरोपी के अवैध मकान (कमरा और बाथरूम) को जमींदोज कर दिया। रात के अंधेरे में बुलडोजर चला, मकान ढह गया। पुलिस आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही है।

यह कार्रवाई सही है। निर्दोष बच्ची के साथ ऐसा अमानवीय अपराध करने वाले को कोई छूट नहीं मिलनी चाहिए। लेकिन सवाल ये है कि ऐसे अपराध बार-बार क्यों हो रहे हैं? और खासकर एक खास समुदाय से जुड़े नाम क्यों बार-बार सामने आते हैं?

एक्स मुस्लिम की नजर में सच्चाई

जब मैं मुस्लिम था, तब भी मैंने देखा था कि हमारी किताबों और मौलवियों की शिक्षाओं में स्त्रियों और गैर-मुस्लिमों के प्रति एक खास मानसिकता भरी हुई है। काफिर, हिंदू लड़कियां, छोटी बच्चियां – इन्हें अक्सर ‘माल-ए-गनीमत’ जैसा व्यवहार मिलता है। इतिहास गवाह है – लव जिहाद, ग्रूमिंग गैंग्स (जैसे रोदरहम, यूके), और भारत में असंख्य ऐसे मामले।

फरमान जैसे लोग अकेले नहीं हैं। मज़हब की आड़ में जो indoctrination होता है, वो इंसानियत को मार देता है। हदीसों और कुरान की कुछ आयतों को लेकर उलेमा जो व्याख्या करते हैं, उसमें गैर-मुस्लिमों के साथ ऐसे व्यवहार को ‘जायज’ ठहराया जाता है। जब तक इस्लामिक teachings में सुधार नहीं होगा, जब तक मदरसों में घृणा की शिक्षा बंद नहीं होगी, तब तक ऐसे अपराध रुकेंगे नहीं।

मैंने खुद इस्लाम छोड़कर देखा – सच्ची मानवता, समानता और न्याय मानवतावादी विचारधार और संवैधानिक मूल्यों में ज्यादा नजर आते हैं। भारत जैसे देश में इस तरह के जघन्य कृत्य की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

बुलडोजर न्याय की जरूरत

Yogi सरकार का ये तरीका सराहनीय है। अवैध निर्माण पर कार्रवाई, आरोपी के परिवार को सजा का एहसास – ये deterrence काम करता है। लेकिन ये अंतिम समाधान नहीं। असली समाधान है:

– शिक्षा सुधार – मदरसों को बंद करके या रेगुलेट करके उसको आधुनिक, वैज्ञानिक शिक्षा अनिवार्य।
– सख्त कानून और तेज ट्रायल।
– समाज में सुधार की बात उठाने वाले आवाजों को दबाने की बजाय समर्थन।
– और सबसे जरूरी – एक्स मुस्लिमों और सुधारक मुस्लिमों की बातों को सुनना।

मैं उन लाखों शांत मुस्लिमों से भी कहना चाहता हूं जो इस सब से दुखी हैं – चुप रहकर आप अपराधियों का साथ दे रहे हैं। आवाज उठाइए।

अंत में

8 साल की उस बच्ची के लिए न्याय हो। उसकी पीड़ा कभी कम नहीं हो सकती, लेकिन समाज जागे। मैं एक्स मुस्लिम होने के नाते कहता हूं – मज़हब से ऊपर इंसानियत है। घृणा और अंधविश्वास छोड़कर संविधान और मानवता को अपनाइए।

जय हिंद।

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