असम के गोलपारा जिले के कृष्णई स्थित हाबराघाट हायर सेकेंडरी स्कूल में 5 जून 2026 को जो हुआ, वह कोई साधारण “टिफिन विवाद” नहीं है। यह मज़हबी घृणा, हिंदू बच्चों को निशाना बनाने और इस्लाम की जीत वाली मानसिकता का जीता-जागता उदाहरण है।
क्या हुआ था घटना वाले दिन ?
कक्षा 9 के पाँच मुस्लिम छात्रों ने स्कूल में बीफ लाकर खाया। सिर्फ खाया ही नहीं, बल्कि दो हिंदू छात्रों को भी उसे खाने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। जब पीड़ित बच्चों ने टीचर को बताया तो स्कूल प्रशासन ने पहले तो मामला दबाने की कोशिश की। माता-पिता जब स्कूल पहुँचे तो FIR दर्ज हुई। पुलिस ने एक छात्र की माँ को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इलाके में तनाव फैल गया। DC और SP तक को मौके पर आना पड़ा।
यह घटना इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि यह स्कूल जैसी पवित्र जगह पर हुई है, जहाँ बच्चों को पढ़ाई, नैतिकता और सह-अस्तित्व सिखाया जाना चाहिए, न कि मज़हबी श्रेष्ठता का ज़हर।
एक्स मुस्लिम के रूप में मेरा अनुभव
जब मैं मुस्लिम घराने में बड़ा हो रहा था, तो बीफ को “हलाल गोश्त” बताया जाता था। हिंदुओं अपने गाय की पूजा करते हैं इस बात का मजाक बनाया जाता था। कई बार मुझे भी मेरे मुस्लिम दोस्तों के द्वारा हिंदू दोस्तों के सामने बीफ खाकर “अपनी पहचान” जताने को कहा गया। लेकिन जब मैं कुरान, हदीस और इस्लाम की असलियत पढ़ने लगा, तो समझ आया कि यह सिर्फ खाने की बात नहीं, बल्कि “अन्य” को अपमानित करने, उन्हें नीचा दिखाने और अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की मानसिकता है।
इस्लाम में गैर-मुस्लिमों (काफिरों) के प्रति जो नफरत भरी शिक्षाएँ हैं, वे बच्चों के दिमाग में भी घर कर जाती हैं। स्कूल में हिंदू बच्चों को बीफ खिलाने की कोशिश ठीक उसी सोच का नतीजा है। यह “इस्लाम की जीत” समझी जाती है। लेकिन सच्चाई यह है कि यह मानवता की हार है।
यह सिर्फ एक घटना नहीं, पैटर्न है
असम हो या दूसरे राज्य, ऐसी घटनाएँ बार-बार हो रही हैं। मंदिरों पर हमले, हिंदू त्योहारों पर पथराव, और अब स्कूलों में बच्चों को निशाना बनाना। क्या मुस्लिम समुदाय को यह समझ नहीं आता कि ऐसे काम पूरे समाज में नफरत फैलाते हैं? क्या वे नहीं देख रहे कि उनकी अगली पीढ़ी को भी इसी ज़हर से बड़ा किया जा रहा है?
मैंने खुद इस्लाम छोड़ने के बाद परिवार और समाज से कितना अपमान झेला है। लेकिन आज मैं खुश हूँ कि सत्य की राह पर हूँ। हिंदू समाज में विविधता है, लेकिन एकता भी है। वे अपनी आस्था का सम्मान करते हैं, दूसरों की भी करते हैं। लेकिन जब कोई उनकी आस्था पर सीधा हमला करता है, तो सहनशीलता की सीमा टूटती है।
हमें क्या करना चाहिए?
– मुस्लिम समुदाय को: अपने बच्चों को सहिष्णुता सिखाएँ। बीफ स्कूल में लाना, उसे हिंदू बच्चों पर थोपना बंद करें। भारत में रहना है तो भारतीय मूल्यों का सम्मान करें।
– सरकार और प्रशासन को: सख्त कार्रवाई करें। स्कूलों में ऐसे मामलों पर जीरो टॉलरेंस हो। बच्चों को राजनीति से दूर रखें।
– हिंदू समाज को: जागरूक रहें। बच्चों को अपनी संस्कृति और आस्था की रक्षा सिखाएँ, साथ ही इस्लामी मानसिकता भी बताएं।
मैं एक एक्स मुस्लिम के रूप में कहता हूँ — इस्लाम की कई शिक्षाएँ सुधार की माँग करती हैं। जब तक मुस्लिम समाज खुद को सुधारेगा नहीं, ऐसी घटनाएँ होती रहेंगी। और मज़हब के ठेकेदार ये मौलवी मल्ला ऐसा होने नहीं देंगे ये बात भी मैं जानता हूं क्योंकि इसी से उसकी दुकान चलती है।
भारत एक सभ्य देश है। यहाँ सबको साथ रहना है। लेकिन साथ रहने के लिए सबको अपने देश की सभ्यता और संस्कृति का सम्मान करने आना चाहिए।
जय हिंद।





