इस्लामी कट्टरपंथ की जन्नत: हिंदू महिलाओं का बलात्कार और “72 हूरों” का भ्रम

  नमस्ते दोस्तों, मैं एक एक्स-मुस्लिम हूँ। मैंने इस्लाम को पढ़ा, समझा, उसकी किताबों में डूबा और फिर उसे छोड़ दिया। आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो साफ दिखता है कि इस्लाम की “जन्नत” नाम की वह खूबसूरत कहानी असल में कितना घिनौना भ्रम है। यह भ्रम उन कट्टरपंथियों को जिंदा रखता है […]

ग़ुलामों को ज़िना की सज़ा देने के लिए चार गवाहों की ज़रूरत नहीं — मालिक या हाकिम अफ़वाहों या शक के आधार पर कोड़े मार सकता है

आज़ाद मुस्लिम औरतों (जैसे हज़रत आयशा) के मामले में नबी मुहम्मद ﷺ ने ज़िना साबित करने के लिए बहुत सख़्त शर्तें रखी थीं: चार मर्द गवाह ज़रूरी हैं। उन्होंने सीधे संभोग देखा हो (जिसे “कोहल की डंडी कोहलदान में डालने” जैसा बताया गया है)। अगर चार गवाह पूरे नहीं हैं, तो बाक़ी तीन गवाहों को […]

इस्लाम में कुंवारी ग़ुलाम लड़की की गर्भावस्था को ज़िना का सबूत मानना — भले ही बलात्कार हुआ हो

इस्लामी शरीयत में एक आज़ाद मुस्लिम मर्द द्वारा ग़ुलाम लड़की के साथ बलात्कार साबित करना लगभग असंभव था। ज़िना (अवैध यौन संबंध) साबित करने के लिए चार मर्द गवाहों की ज़रूरत होती थी, जो सीधे संभोग देखें। बलात्कार के मामलों में ऐसे गवाह लगभग कभी उपलब्ध नहीं होते थे। फिर भी व्यवस्था ने ग़ुलाम औरत […]