इस्लाम में कुंवारी ग़ुलाम लड़की की गर्भावस्था को व्यभिचार (ज़िना) का सबूत मानना – भले ही उसका बलात्कार हुआ हो

इस्लामी शरीयत में एक आज़ाद मुस्लिम मर्द द्वारा ग़ुलाम लड़की के साथ बलात्कार साबित करना लगभग असंभव था। ज़िना (अवैध यौन संबंध) साबित करने के लिए चार मर्द गवाहों की ज़रूरत होती थी, जो सीधे “कोहल की डंडी को कोहलदान में डालने जैसा” (यानी संभोग) देखें। बलात्कार के मामलों में ऐसे गवाह लगभग कभी नहीं […]
इस्लामी शरीयत में मालिक को अपने ग़ुलाम को मारने की पूरी छूट: कोई सज़ा नहीं

कल्पना कीजिए एक ग़ुलाम की, जिसे उसके मालिक ने इतनी क्रूरता से पीटा कि वो मर गया—लेकिन मालिक को न तो क़िसास (बदला) की सज़ा मिली, न दीया (ख़ून-बहार) देने की ज़रूरत पड़ी, और न ही कोई दूसरी सज़ा। इस्लामी फ़िक़्ह के अनुसार मालिक को अपने ग़ुलाम को मारने पर कोई सज़ा नहीं होती—क्योंकि ग़ुलाम […]