क्या तुम्हारा मज़हब सच में तुम्हारा है?

कभी एक पल को रुककर गहराई से सोचा है कि जिस मज़हब के लिए तुम जीते हो, मरते हो, और कभी-कभी दूसरों को मारने को भी तैयार हो जाते हो — वह मज़हब तुमने कभी खुद चुना था? तुम शायद तुरंत कहोगे, “हाँ, मैंने तो किताबें पढ़ीं, रिसर्च की, दिल से अपनाया।” ठीक है। लेकिन […]
माल-ए-ग़नाम की कहानी: दैवी वह्य या मुहम्मद की बनाई हुई वह्य?

माल-ए-ग़नाम की कहानी: दैवी वह्य या मुहम्मद की बनाई हुई वह्य? मदीना में मुहम्मद और उनके साथियों के पास रोज़ी-रोटी का कोई ज़रिया नहीं था। उनकी कमाई का इकलौता तरीका था – काफ़िलों पर हमला करना और माल-ए-ग़नीमत लूटना। औरतें और छोटे बच्चे भी गुलाम बना लिए जाते थे – ज़िंदगी भर के लिए। उनकी […]