इस्लामी चंद्र कैलेंडर और 4 हराम महीनों के पीछे कोई हिकमत नहीं

मुहम्मद जब अपना नया दीन बना रहे थे तो उन्होंने यहूदियों-ईसाइयों से खूब उधार लिया। एक अल्लाह, नबी, फरिश्ते – सब कुछ वहीं से चुराया। लेकिन अरबों में पकड़ बनाने के लिए काबा और हज को भी दीन में डाल दिया, क्योंकि ये चीजें अरबों के दिल में पहले से बसती थीं। एक पुरानी अरबी […]

इस्लाम का सच: आस्था या मौलानाओं की गुलामी?

जब आस्था ग़ुलामी बन जाए एक बेबाक नज़र आज के मुसलमान की दीनदारी पर किसी ज़माने में कहा जाता था कि इस्लाम दीन-ए-फ़ितरत है, दीन-ए-अक़्ल है। अल्लाह ने इंसान को आँखें दीं, कान दिए, और सबसे बड़ी नेमत—अक़्ल दी, ताकि वह सोचे, समझे, ग़ौर करे और फिर यक़ीन करे। लेकिन आज अगर आप दुनिया के […]