मुहम्मद ने खुद शरीयत बनाई और बाद में उसे वह्य कहा

मुहम्मद ने खुद शरीयत बनाई और बाद में उसे वह्य कहा

सहीह मुस्लिम 1442b नबी ﷺ ने फरमाया: “मैंने दूध पिलाने वाली औरतों से हमबिस्तरी रोकने का इरादा किया, लेकिन रोमियों और फारसियों को देखा – वो अपने बच्चों को दूध पिलाती हैं और इससे कोई नुक़सान नहीं होता।”

ये हदीस पुख़्ता सबूत है कि आसमान पर कोई अल्लाह नाम की हस्ती नहीं। बल्कि मुहम्मद खुद क़ानून बनाते थे और बाद में उन्हें वह्य का नाम देते थे। अक़्ल रखने वालों के लिए ये एक हदीस इस्लाम के पूरे ढाँचे को गिराने के लिए काफ़ी है।

अगर रोम और फ़ारस के लोग न होते तो इस्लामी शरीयत में दूध पिलाने वाली औरतों से सेक्स पर पाबंदी होती – और मुसलमान आज भी इस साइंसी ग़लती के बहाने बनाते, जैसे हामिला औरत की इद्दत की ग़लती के बहाने बनाते हैं।

सुनन अबू दाऊद 2158 नबी ﷺ ने फरमाया: “जो शख़्स अल्लाह और आख़िरत पर यकीन रखता है, उसके लिए जायज़ नहीं कि वो दूसरों के बोए हुए खेत में पानी डाले (यानी हामिला औरत से हमबिस्तरी)।”

लेकिन साइंस साफ़ कहती है कि मुहम्मद ग़लत थे। एक औरत एक मर्द से हामिला हो जाए तो दूसरा मर्द कितना भी सेक्स कर ले, बच्चे पर कोई असर नहीं – DNA नहीं बदलता। ये जाहिलियत के ख़्याल थे जिन्हें मुहम्मद ने अपनाया।

मुहम्मद की इस ग़लती की मार फिर औरत पर पड़ी:

  • हामिला औरत दूसरे मर्द से शादी नहीं कर सकती
  • अपनी सेक्सुअल ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकती
  • दूसरे मर्द का प्यार-सपोर्ट नहीं ले सकती
  • अकेले गर्भ की तक़लीफ़ झेलनी पड़ती है

अगर कोई मर्द हामिला औरत का ख़याल रखे, उसे खुश रखे – बच्चे को भी फायदा – इसमें बुराई क्या?

दीन क्यों कहता है कि हामिला औरत अकेली तड़पे – माँ और बच्चे दोनों को नुक़सान?

क़ब्र का अज़ाब भी यहूदिया से कॉपी किया

सहीह मुस्लिम 584 आयशा से: नबी ﷺ मेरे घर आए, एक यहूदिन थी जो कह रही थी: “क्या पता तुम्हें क़ब्र में आज़माइश होगी?” नबी ﷺ सुनकर काँप गए और बोले: “ये सिर्फ़ यहूदियों के साथ होगा।” कुछ रातें गुज़रीं, फिर नबी ﷺ बोले: “मुझे वह्य आई है कि तुम्हें क़ब्र में आज़माइश होगी।”

अक़्ल रखने वालों के लिए

ये वाक़िया पूरा सबूत है:

  • पहले क़ब्र का अज़ाब सिर्फ़ यहूदियों का बताया
  • यहूदिन की बात सुनकर बाद में खुद के लिए भी मान लिया

ये अल्लाह की वह्य नहीं – मुहम्मद खुद क़ानून बनाते और बाद में “वह्य” कहते थे।

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