इस्लाम में ग़ुलामों की गवाही को “इंसानी” नहीं माना गया – कोर्ट में उनकी कोई वैल्यू नहीं

इस्लामी शरीयत के तहत एक तरफ़ तो ग़ुलाम औरत का एक अकेला बयान ही काफ़ी था कि कोई शख़्स उसके साथ यौन संबंध बना सके (यानी अगर वो औरत कहे कि मेरे मालिक ने मुझे आपको हलाल कर दिया है, तो उस पर यक़ीन करके उसके साथ हमबिस्तरी जायज़ थी)। लेकिन दूसरी तरफ़, अल्लाह/मुहम्मद ने […]