सूडान का खूनी इतिहास: नरसंहार और औरतों पर जुल्म

सूडान का खूनी इतिहास: नरसंहार और औरतों पर जुल्म

सूडान मुस्लिम देश है, लेकिन 1956 से आज तक खून बह रहा है। लाखों लोग मारे गए, गांव जले, औरतें तबाह हुईं। ये इस्लाम की शिक्षा का नतीजा है – अल्लाह के नाम पर खून-खरबा, शरीयत को जबरन थोप देना और अरबों का खुद को श्रेष्ठ समझना। मुसलमान चुप रहते हैं, क्योंकि ये उनके ही मज़हब की हकीकत है।

 

पहला युद्ध (1955-1972): इस्लाम थोपने की शुरुआत

उत्तर सूडान के मुसलमानों ने दक्षिण सूडान पर अरबी-इस्लामी कानून डालने की कोशिश की। इस का नतीज़ा क्या हुआ देखिये 5-10 लाख लोग मारे गए। गांव जलाए, सामूहिक हत्याएं हुईं, औरतें बलात्कार और गुलामी की शिकार बनीं। अल्लाह के नाम पर ये सब जुल्म हुआ।

दूसरा युद्ध (1983-2005): सबसे बड़ा कत्लेआम

इस्लामिस्ट तनाशाह बशीर ने शरिया पूरे देश पर थोप दिया। इस का नतीजा यह हुआ कि बीस लाख से ज्यादा लोग मारे गए। और सबसे बुरा हुआ छोटी बच्चियाँ और औरतों – बलात्कार, अपहरण, जबरन शादी। ये जिहाद की सोच थी।

 दारफुर नरसंहार (2003-2008): मुसलमानों का आपसी कत्ल

सब मुसलमान थे, फिर भी बशीर ने अरब मिलिशिया (जनजवीद) को हथियार दिए। इस का भी वही नतीज़ा निकला वही ख़ून-ख़राबा 2-4 लाख लोग मारे गए। गैर-अरब मुसलमानों के गांव दिये गये, कूवों में जहर डाल दिये गये, औरतों को गैंगरेप किया गया और उन लोगों को सेक्स गुलाम बनाया गया। ये अरब श्रेष्ठता की जहालत थी।

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आज का युद्ध (2023 से अब तक): फिर वही नरसंहार

अगर आज को देखें तो RSF (Rapid security forces) और सेना लड़ रहे हैं। और अब 4 लाख से ज्यादा मौत का अनुमान लगाया जा रहा है। दारफुर में जातीय सफाया किया जा रहा है , शहर तबाह होते जा रहे हैं, हजारों औरतें बलात्कार की शिकार हो रही हैं जिनमें छोटी बच्चियां तक शामिल है। और ये सब कुछ मुसलमान  अल्लाहु अकबर बोलकर कर रहे हैं।

 मुस्लिम दुनिया की hypocrisy: सूडान भूला, गाजा पर आंसू

सूडान दुनिया का सबसे बड़ा संकट है – 30 मिलियन लोग मदद मांग रहे, 14 मिलियन बेघर हो चुके हैं और भूखमारी के शिकार हो चुके हैं। UN ने 2025 के लिए 4.2 बिलियन डॉलर मांगे, लेकिन सिर्फ 27% ही मिले। लोग भूख से मर रहे, लेकिन दुनिया चुप है। दूसरी तरफ गाजा पर सब रो रहे हैं – हजारों करोड़ डॉलर डोनेशन इकट्ठे हो चुके, EU अकेले 450 मिलियन से ज्यादा दे चुका। प्रोटेस्ट, मीडिया कवरेज सब गाजा को, बड़े-बड़े सेलिब्रिटी भी गाजा पर बोल और सोशल मीडिया पर लिख चुके हैं। सूडान को भुला दिया गया है जैसे ये दुनिया में मौजूद ही ना हो। क्यों? क्योंकि गाजा की जंग मुस्लिम vs यहूदी लगता है, लेकिन सूडान की जंग  मुसलमान vs मुसलमान। दुनिया की hypocrisy साफ है – मुस्लिम पीड़ित तभी महत्वपूर्ण है जब दुश्मन गैर-मुस्लिम हो। सूडान के मासूमों की कोई परवाह नहीं।

 

आखिरी बात: इस्लाम की असलियत

ये नरसंहार और जुल्म इस्लाम की जड़ में हैं। अल्लाह और शरिया ने मुसलमानों को हिंसा सिखाई। औरतों को माल ए ग़नीमत बनाया है। मुस्लिम दुनिया चुप है क्योंकि ये उनके मज़हब का हिस्सा है। मैंने इस्लाम छोड़ा क्योंकि ये सिर्फ तबाही लाता है। सूडान के लोग आज अगर मर रहे हैं तो इसका जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ मुसलमान ही है क्योंकि उन्हें हर हाल में इस्लाम के साथ जीना है।

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