KGMU का जिहादी स्कैंडल: इस्लामिक कट्टरता की घुसपैठ और हिंदू महिलाओं का शोषण

KGMU का जिहादी स्कैंडल: इस्लामिक कट्टरता की घुसपैठ और हिंदू महिलाओं का शोषण

नमस्कार दोस्तों, मैं एक Ex Muslim हूं, जो इस्लाम की कट्टरता और उसकी शिक्षाओं की गहराई से जांच-पड़ताल करता हूं। सालों से मैंने देखा है कि कैसे इस्लाम के नाम पर कुछ लोग अपनी जिहादी मानसिकता को फैलाते हैं, और इसका शिकार अक्सर निर्दोष महिलाएं बनती हैं। आज मैं बात कर रहा हूं लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के उस घिनौने स्कैंडल की, जो इन दिनों सुर्खियों में है। यहां एक जिहादी गैंग का पर्दाफाश हुआ है, जो हिंदू लड़कियों को प्रेम के जाल में फंसाकर उन्हें इस्लाम कबूल करने और निकाह करने के लिए दबाव बनाती थी। यह कोई नई बात नहीं है – यह वही पुराना पैटर्न है जो “लव जिहाद” के नाम से जाना जाता है, जहां इस्लाम की कुछ शिक्षाएं, जैसे गैर-मुस्लिम महिलाओं से निकाह को “शवाब” का काम बताकर, युवाओं को ब्रेनवॉश किया जाता है। लेकिन KGMU का यह मामला तो हद पार कर गया है, जहां डॉक्टर जैसे पढ़े-लिखे लोग भी इस कट्टरता के शिकंजे में फंसकर अपराध कर रहे हैं। चलिए, इसकी पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।

 

 स्कैंडल का खुलासा: एक खुदकुशी की कोशिश से शुरू हुई जांच

यह सब 17 दिसंबर 2025 को सामने आया, जब KGMU की एक हिंदू महिला डॉक्टर ने जहर खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की।उसने पैथोलॉजी विभाग के अपने सीनियर डॉक्टर रमीज मलिक (उर्फ रमीजुद्दीन मलिक) पर आरोप लगाया कि उसने उसे निकाह करने और इस्लाम अपनाने के लिए दबाव डाला, साथ ही शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी। पीड़िता की कहानी दिल दहला देने वाली है – रमीज ने पहले शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए, प्रेग्नेंट होने पर दवा देकर गर्भपात कराया, और फिर अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। वह कहता था, “धर्मांतरण कर लो, वरना वीडियो वायरल कर दूंगा और तुम्हारी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।”

पीड़िता ने जब दूरी बनाने की कोशिश की, तो रमीज की कट्टरता और बढ़ गई। उसने अपनी पहली पत्नी मानसी सक्सेना (जो पहले हिंदू थी) के बारे में भी बताया – उसे भी जबरन इस्लाम कबूल करवाकर निकाह किया गया।

यह देखकर मुझे लगता है कि इस्लाम की कुछ व्याख्याएं, जहां गैर-मुस्लिम महिलाओं से निकाह को एक तरह का “जिहाद” माना जाता है, किस हद तक खतरनाक हो सकती हैं। कुरान और हदीसों में ऐसी शिक्षाएं हैं जो कट्टरपंथियों को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हिंदू या अन्य धर्म की महिलाओं को “बचाना” उनका फर्ज है, लेकिन असल में यह शोषण का एक तरीका है।

 

पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य महिला आयोग से शिकायत की। महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान और उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कुलपति से मुलाकात की और कहा कि यह एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि पूरी गैंग है।

सीएम योगी ने पीड़िता से मिलकर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद रमीज को KGMU से सस्पेंड किया गया, लेकिन वह फरार हो गया। पुलिस ने पहले 25 हजार, फिर 50 हजार का इनाम घोषित किया, और आखिरकार 9 जनवरी 2026 को उसे गिरफ्तार कर लिया।

रमीज का परिवार: जिहादी सोच की जड़ें

जांच में रमीज के पिता सलीमुद्दीन और मां खतीजा को भी गिरफ्तार किया गया। सलीमुद्दीन खुद एक जिहादी निकला – उसने चार हिंदू महिलाओं से निकाह किया और उनका धर्मांतरण कराया। उसकी पत्नियां जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की हैं। खतीजा भी पहले हिंदू थी। सलीमुद्दीन पीलीभीत के एक काजी से जुड़ा था और देवबंद जाता रहता था। रमीज इसी कट्टर वातावरण में पला-बढ़ा। 2012 में आगरा मेडिकल कॉलेज में उसका दाखिला हुआ, जहां “इस्लामिक मेडिकोज मीट” जैसी बैठकें होती थीं। यहां मौलाना और सीनियर छात्र जूनियर्स को सिखाते थे कि हिंदू लड़कियों से कैसे दोस्ती बढ़ाई जाए और उन्हें इस्लाम में लाया जाए।

यह पैटर्न मुझे इस्लाम की उस विचारधारा की याद दिलाता है जो “तकिया” (झूठ बोलकर धोखा देना) और जिहाद को बढ़ावा देती है। जाकिर नाइक जैसे प्रचारकों के वीडियो रमीज के फोन में मिले, जो हिंदू घृणा फैलाते हैं। यहां तक कि दिल्ली ब्लास्ट की आरोपी डॉ. शाहीन से भी उसका कनेक्शन सामने आया। यह दिखाता है कि कैसे कट्टर इस्लामिक नेटवर्क मेडिकल जैसे प्रोफेशनल फील्ड्स में घुसपैठ कर रहे हैं।

 

बड़ा नेटवर्क: 15 लाख का “रेट” और 50 से ज्यादा पीड़िताएं

रमीज के फोन और लैपटॉप से चौंकाने वाले खुलासे हुए। उसने “जन्नत” नाम का फोल्डर बनाकर 50 से ज्यादा हिंदू लड़कियों की फोटो, वीडियो और डिटेल्स सेव की थीं। वह 15 हिंदू महिलाओं पर धर्मांतरण का दबाव बना रहा था, जिनमें छात्राएं और प्रोफेसर शामिल थीं। एक बड़ा नेटवर्क था, जहां डॉक्टरों के धर्मांतरण पर 15 लाख और आम लोगों पर 5 लाख का “रेट” तय था। मौलाना डॉक्टरों को दो हिंदू महिलाओं से निकाह करने का “संकेत” देते थे।

 

KGMU के अलावा आगरा, नोएडा और अन्य जगहों पर उसका जाल फैला था। एक हिंदू महिला डॉक्टर ने बताया कि रमीज ने फर्जी निकाहनामा बनवाकर उसका शोषण किया। KGMU प्रशासन की मिलीभगत भी उजागर हुई – पैथोलॉजी HoD वाहिद अली को हटाया गया, क्योंकि उन्होंने मामले को दबाया।एक और डॉक्टर मोहम्मद आदिल को भी गिरफ्तार किया गया, जो इसी पैटर्न पर काम कर रहा था।

 

KGMU में अवैध मजारें और पुराना इतिहास

KGMU कैंपस में आधा दर्जन अवैध मजारें हैं, जो सुरक्षा के लिए खतरा हैं। VHP के अनुसार, इनके पास अतिक्रमण हटाने पर हमले हुए हैं। समाजवादी पार्टी और बसपा के दौर में यह कैंपस धर्मांतरण का अड्डा बना था, जहां मौलाना आते-जाते थे। योगी सरकार में कुछ शांति आई, लेकिन अब फिर से सक्रिय हो गए हैं।

 

अंत में: इस्लाम की कट्टरता पर सवाल

यह मामला सिर्फ एक डॉक्टर या गैंग की कहानी नहीं, बल्कि इस्लाम की उस कट्टर विचारधारा का नतीजा है जो गैर-मुस्लिमों को “काफिर” मानकर उनका शोषण जायज ठहराती है। जाकिर नाइक जैसे लोग युवाओं को ब्रेनवॉश करते हैं, और देवबंद जैसी जगहें इसकी जड़ हैं। मैं, एक इस्लामिक आलोचक के तौर पर, कहता हूं कि ऐसी शिक्षाओं की जांच होनी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून और जागरूकता जरूरी है। क्या आप सहमत हैं? कमेंट्स में बताएं। जय हिंद!

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