300 हिंदू युवतियों को देह व्यापार में धकेला, विदेशों तक फैले नेटवर्क: बस्ती में धर्मांतरण गिरोह का सरगना निकला अजफरुल हक

300 हिंदू युवतियों को देह व्यापार में धकेला, विदेशों तक फैले नेटवर्क: बस्ती में धर्मांतरण गिरोह का सरगना निकला अजफरुल हक

नमस्ते दोस्तों, फिर से आपका वही Ex मुस्लिम यहाँ हाजिर है – जो इस्लाम छोड़कर इंसानियत और तर्क की राह पर चल पड़ा। मेरे ब्लॉग को पढ़ने वाले जानते हैं कि मैंने बचपन से मुस्लिम परिवार में रहकर इस्लाम के नियमों, प्रथाओं और उनके असल प्रभावों से जूझा है। आज मैं उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की उस दिल दहला देने वाली खबर पर बात कर रहा हूँ, जिसमें अजफरुल हक नाम के शख्स और उसके गिरोह पर 300 से ज्यादा हिंदू लड़कियों को फंसाने, ब्लैकमेल करने, जबरन धर्मांतरण कराने और देह व्यापार में धकेलने के गंभीर आरोप हैं। यह सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है; यह धर्म को हथियार बनाकर महिलाओं पर अत्याचार का एक काला अध्याय है। मेरे जैसे Ex- Muslim के लिए यह खबर खून खौलाने वाली है। चलिए, इसे थोड़ा खोलकर देखते हैं।

खबर के मुताबिक, अजफरुल हक खुद को ‘प्रिंस’ बताकर हिंदू लड़कियों को निशाना बनाता था। हाथ में कलावा बाँधकर, नौकरी या शादी का लालच देकर भरोसा जीतता, फिर प्रेम जाल में फंसाकर अश्लील वीडियो बनाता और ब्लैकमेल करता। इनकार करने पर परिवार को धमकियाँ, भाई को अगवा करने की बातें, और यहाँ तक कि गैंगरेप तक। एक बहादुर पीड़िता ने 15 जनवरी 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज की, जिसके बाद अजफरुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उसके परिवार के कई सदस्य भी नामजद हैं, जिनमें भाई शान (जो फरार है) भी शामिल है। पुलिस की जाँच में उसके फोन, सोशल मीडिया और एक गुप्त होटल से कई सबूत मिले हैं – जहाँ कोई रिसेप्शन नहीं, कोई आईडी नहीं, गुप्त दरवाजे और संकरी गलियाँ… जैसे कोई डरावना अड्डा हो।

एक Ex Muslim के तौर पर मुझे इसमें “लव जिहाद” की वो कड़वी सच्चाई दिखती है, जिसे कुछ लोग साजिश कहकर खारिज करते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में यह बहुत वास्तविक लगती है। अजफरुल सिर्फ एक शिकारी नहीं था; वह जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाता था – लड़कियों से “इस्लाम जिंदाबाद” कहलवाने की कोशिश करता था। कुरान में (जैसे सूरह 2:221) मुस्लिम पुरुषों को गैर-मुस्लिम महिलाओं से निकाह की इजाजत है, लेकिन कई व्याख्याओं में यह धर्म परिवर्तन और प्रभुत्व पर जोर देती है। इतिहास में युद्धों के दौरान कैदी महिलाओं को लूट का माल मानने की परंपरा कुछ मज़हबी लोगों की सोच में आज भी बची हुई है। मैं यह नहीं कह रहा कि हर मुस्लिम ऐसा करता है – ज्यादातर अच्छे लोग हैं – लेकिन जब मज़हब को आम जिंदगी के साथ जोड़ा जाता है, तो ऐसी घटनाएँ जन्म लेती हैं।

सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि यह व्यवस्थित था। 300 से ज्यादा लड़कियों के वीडियो बनाकर ब्लैकमेल, फिर उन्हें देह व्यापार में धकेलना, और नेटवर्क नेपाल व अन्य राज्यों तक फैला होना – यह मानव तस्करी है, जिसे मज़हबी बहाने से ढका गया। पीड़िता की आजतक को दी इंटरव्यू में बात सुनकर आँसू आ जाते हैं। उसने धर्मांतरण का विरोध किया, हिंदू रहने पर जोर दिया, लेकिन बदले में यातना, परिवार पर हमले की धमकियाँ और अजफरुल व उसके भाइयों द्वारा गैंगरेप झेलना पड़ा। परिवार का पूरा शामिल होना – यह मुझे उन रूढ़िवादी मुस्लिम समुदायों की याद दिलाता है जहाँ मज़हबी पवित्रता को लेकर सहमति बन जाती है।

लेकिन यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। भारत में ऐसे कई पुराने और हाल के मामले सामने आए हैं, जो “लव जिहाद” के नाम से चर्चित हुए हैं – जहाँ प्रेम जाल, ब्लैकमेल, गैंगरेप और तस्करी का पैटर्न बार-बार दोहराया गया है। एक Ex मुस्लिम के तौर पर मुझे लगता है कि इन मामलों को सिर्फ “व्यक्तिगत अपराध” कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता; इनमें मज़हब को हथियार बनाकर महिलाओं का शोषण दिखता है।

बस्ती का मामला 2026 में सामने आया, लेकिन यह अजमेर कांड (1992) जैसा लगता है – जहाँ प्रभावशाली परिवार के लोग स्कूल की लड़कियों को फंसाते थे, रेप करते थे, फोटो/वीडियो से ब्लैकमेल करते थे और सालों तक चुप रखते थे। अजमेर में भी धार्मिक प्रभाव वाले लोग शामिल थे, और पीड़िताओं को धमकाकर चुप रहने पर मजबूर किया गया। बस्ती में अजफरुल ने कलावा बाँधकर हिंदू बनने का नाटक किया, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया, और परिवार के साथ मिलकर गैंगरेप तक किया – ठीक उसी पैटर्न में। कई रिपोर्ट्स में इसे “अजमेर कांड टाइप” कहा गया है, क्योंकि दोनों में संगठित गिरोह, ब्लैकमेल और यौन शोषण का नेटवर्क था।

उत्तर प्रदेश में ही ऐसे कई मामले हैं। जैसे, 2025 में बालरामपुर में चंगूर बाबा (जलालुद्दीन) का कन्वर्जन रैकेट पकड़ा गया – जहाँ हिंदू महिलाओं को लालच, प्रेम जाल या जबरदस्ती इस्लाम में लाने की कोशिश की गई। एक कर्नाटक की महिला ने बताया कि उसे सऊदी अरब ले जाकर बेचने की कोशिश की गई, गैंगरेप हुआ, और जबरन कन्वर्जन कराया गया। यह रैकेट भी “लव जिहाद” से जुड़ा था, जहाँ हिंदू नाम से फंसाकर कन्वर्जन और शोषण होता था।

एक और उदाहरण: 2025 में यूपी पुलिस ने “मिशन अस्मिता” के तहत 10 लोगों को गिरफ्तार किया – राजस्थान, बंगाल, उत्तराखंड आदि से – जो बड़े पैमाने पर अवैध कन्वर्जन रैकेट चला रहे थे। इसमें भी “लव जिहाद” का आरोप था, जहाँ हिंदू लड़कियों को टारगेट कर कन्वर्जन और रेडिकललाइजेशन की कोशिश हुई।

पुराने मामलों में, 2020-2021 में यूपी में “लव जिहाद” कानून लागू होने के बाद सैकड़ों केस दर्ज हुए – जैसे मुजफ्फरनगर में एक मुस्लिम युवक पर फ्रॉड और जबरन कन्वर्जन का आरोप लगा, लेकिन बाद में पीड़िता ने कहा कि यह राजनीतिक था। फिर भी, कई केसों में परिवार की शिकायत पर गिरफ्तारियाँ हुईं, और महिलाओं को शेल्टर में रखा गया। 2025 में मध्य प्रदेश में भी एक कांग्रेस नेता पर “लव जिहाद प्लॉट” का आरोप लगा, जहाँ कन्वर्जन रैकेट का खुलासा हुआ।

ये सभी मामले अलग-अलग लगते हैं, लेकिन पैटर्न एक जैसा है: हिंदू नाम/पहचान से ट्रस्ट बनाना, रिलेशनशिप में फंसाना, अश्लील वीडियो/फोटो से ब्लैकमेल, धर्मांतरण का दबाव, और कई बार गैंगरेप या तस्करी। एक Ex मुस्लिम के नजरिए से देखें तो यह इस्लाम की कुछ व्याख्याओं (जैसे गैर-मुस्लिम महिलाओं को कन्वर्ट करने का जोर) का दुरुपयोग लगता है, जहाँ मज़हब को पावर गेम में इस्तेमाल किया जाता है।

मैंने इस्लाम छोड़ा क्योंकि मैं इन ग्रंथों (कुरान, हदीस) में महिलाओं के अधिकारों और सहमति की कमी को बर्दाश्त नहीं कर सका। पैगंबर की शादियाँ, गुलामी के नियम – इन्हें आज के समय में ट्विस्ट करके महिलाओं के शरीर पर कब्जा जमाने का बहाना बनाया जाता है। बस्ती का यह मामला अलग नहीं है; केरल से यूपी तक ऐसे कई केस सामने आते हैं, अक्सर फंडेड रूपांतरण नेटवर्क से जुड़े। हिंदू लड़कियों को क्यों टारगेट? क्योंकि कुछ व्याख्याओं में “काफिरों” को इस्लाम में लाना पुण्य का काम माना जाता है, और महिलाएँ आसान शिकार लगती हैं। यह पवित्रता का मुखौटा पहने ताकत का खेल है। अगर इस्लाम में सहमति और समानता सच में महत्वपूर्ण होती, तो ऐसी कहानियाँ बार-बार क्यों आतीं? हमें खुले संवाद, सुधार और हर महिला की सुरक्षा की जरूरत है।

अंत में, बस्ती की उन पीड़िताओं के प्रति मेरी गहरी संवेदना। आपकी हिम्मत से बोलने की ताकत लाखों को प्रेरित करेगी। अगर आप ऐसी स्थिति में हैं, तो पुलिस, एनजीओ या मददगार लोगों से संपर्क करें – आप अकेली नहीं हैं। अजफरुल जैसे लोगों को सख्त सजा मिलनी चाहिए, और जाँच से पूरा नेटवर्क उजागर होना चाहिए।

आप क्या सोचते हैं? क्या आपके पास ऐसे मामले देखे हैं? कमेंट्स में बताइए – बातचीत जारी रखें।

 

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