राजस्थान के जोधपुर से दो युवतियों को सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर बहला-फुसलाकर ले जाने का मामला सामने आया है। न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, आकिब अंसारी और सैयद इब्राहिम ने कथित रूप से हिंदू नामों से सोशल मीडिया अकाउंट बनाए और दोनों लड़कियों से दोस्ती की।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों युवतियों को जोधपुर से बाहर ले जाया गया और अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर उन्हें पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान कथित तौर पर लड़कियों को ₹8–10 लाख में बेचने की योजना की बात सामने आई। रिपोर्ट में यह भी दावा है कि इससे पहले ऐसी पांच लड़कियों को बांग्लादेश ले जाकर बेचने की बात आरोपियों से पूछताछ में सामने आई।
यह घटना न तो पहली है और न आखिरी। इस्लामिक इतिहास और वर्तमान दोनों में गैर-मुस्लिम महिलाओं (विशेषकर हिंदुओं) को यौनदासी बनाने, उनकी जबरन निकाह, धर्मांतरण, और यौन उत्पीड़न करने की घटनाएं आम रही हैं।
आज भी, तालिबान और ISIS जैसे आतंकवादी समूह युद्धबंदियों को रखैल बनाते हैं। हमारी सरकार चुप्पी साध लेती है—क्योंकि वोटबैंक बचाना ज़्यादा महत्वपूर्ण लगता है।
इस लेख में, हम इस्लामिक शिक्षाओं, ऐतिहासिक उदाहरणों, और समकालीन अपराधों पर चर्चा करेंगे। इसका उद्देश्य धार्मिक विद्वेष फैलाना नहीं बल्कि सत्य उजागर करना, तथ्य प्रस्तुत करना, और भारतीय समाज—विशेषकर उसकी महिलाओं—को खतरों से आगाह करना है।
इस्लामिक शिक्षाएँ: “हव्वाज” (सेक्स ऑब्जेक्ट)
- पैगंबर मुहम्मद ने खुद कई गैर-मुसलिम महिलाओं (जैसे सफ़िया, रेहाना) को रखैल बनाया। सहिह बुखारी (8:367) कहता है: “अल्लाह नबी सल. पर अपनी पत्नियों सहित सभी चीज़ें हलाल कर देता है, जैसाकि वह आपको हर चीज़ हलाल करता है।”
- कुरआन 23:6 कहता है: “और जिन्हें तुम्हारे दाहिने हाथ ने कब्ज़ा कर लिया, उन सब [औरतों] पर…”
यहाँ “दाहिना-हाथ” संग्रहीत/कब्ज़े वाली मतलब गुलाम युद्धबंदियाँ। - कुरआन 4:24: “और ऐसी [गुलाम] औरतें जिनको तुम्हारे दाएँ [हाथ] कब्ज़ा कर रखें…”
एक एक्स मुसलमान के रूप मे, इन आयातों और हदीसों से स्पष्ट है की – गैर-मुस्लिम महिलाएं यौनदासियां (“माले-ए-ग़नीमत”) बनाई जाती; उनका धर्मांतरण अनिवार्य नहीं था।
ऐतिहासिक उदाहरण
- 1. महमूद ग़ज़नवी 11वीं शताब्दी, भारत पर हमला: इब्न अल कथिर (9वीं सदी) लिखता: “1005 ई. में, महमूद नगरकोट पहुँचा। उसने शहर जलाया, मन्दिर तोड़े, 4,00,000 लड़के-लड़कियाँ पकड़े।” (तरीख अल-कामल)
- 2. फिरोज़शाह तुगलक। 14वीं, फ़तुवा-ए-फिरोज़ी कहता: “…अगर [युद्धबंदियों] खुश रहतीं, तो उन्हें बेचनेवालों तक पहुँचाया। अगर नहीं, तो उनके टुकड़े करके।”
निष्कर्ष –
यह सिर्फ एक मज़हबी आदेश नहीं बल्कि एक राजनीतिक डिज़ाइन है। ये भारतीय समाज तोड़ने, धर्मांतरण बढ़ाने, जनसंख्या असंतुलन फैलाने की योजना का हिस्सा है।
हमें अब चुप रहना बंद करना चाहिए। इन अपराधियों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। अगर हम आज नहीं जागे, तो कल आपकी बहन, आपकी बेटी, आपकी पत्नी सभी को अपनी यौनदासी बनाएंगे।
यह मामला एक और बात सिखाती है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते वक्त कितनी सावधानी जरूरी है। युवाओं और अभिभावकों को ऑनलाइन निजी जानकारी साझा करने में सावधानी और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान होते ही तत्काल पुलिस को सूचना देने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।




