बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार: इस्लामिक कट्टरपंथ की एक और दर्दनाक मिसाल – चंचल चंद्र भौमिक की जिंदा जलाकर हत्या

बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार: इस्लामिक कट्टरपंथ की एक और दर्दनाक मिसाल – चंचल चंद्र भौमिक की जिंदा जलाकर हत्या

नमस्कार दोस्तों, मैं एक Ex Muslim हूं, जो इस्लाम की आंतरिक सच्चाइयों को समझ चुका हूं और अब खुलकर इसकी आलोचना करता हूं। सालों तक इस्लाम के भीतर रहकर मैंने देखा है कि कैसे इसकी कुछ व्याख्याएं और कट्टरपंथी तत्व अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं, खासकर उन देशों में जहां मुस्लिम बहुसंख्यक हैं। बांग्लादेश, जो कभी पूर्वी पाकिस्तान था और जहां इस्लाम को राज्य धर्म का दर्जा प्राप्त है, आज हिंदुओं के लिए एक जीवित नर्क बन चुका है। आज मैं बात करूंगा हाल ही की एक दिल दहला देने वाली घटना की – 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल चंद्र भौमिक की जिंदा जलाकर हत्या। यह घटना न सिर्फ एक हत्या है, बल्कि इस्लामिक कट्टरपंथ द्वारा प्रेरित सुनियोजित हमलों की एक कड़ी है, जो पिछले कुछ महीनों से जारी है।

 

चंचल चंद्र भौमिक, जो कुमिल्ला जिले के लक्ष्मीपुर गांव का निवासी था, नरसिंदी में एक गैरेज में काम करता था। वह अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था – एक मेहनती युवक, जो रात को उसी गैरेज में सोता था। 23 जनवरी 2026 की रात को, जब वह गहरी नींद में था, कुछ हमलावरों ने दुकान के शटर पर पेट्रोल डाला और आग लगा दी। गैरेज में पेट्रोल और डीजल जैसी ज्वलनशील चीजें होने से आग तेजी से फैली, और चंचल अंदर फंस गया। फायर ब्रिगेड ने एक घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझाई, लेकिन तब तक चंचल की मौत हो चुकी थी – तड़पते हुए, जिंदा जलकर।  परिवार इसे सोची-समझी साजिश बता रहा है, और क्यों न बताए? सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि हमलावर शटर बंद करके पेट्रोल डालते हैं और भाग जाते हैं। पुलिस जांच कर रही है, लेकिन क्या सच बाहर आएगा? बांग्लादेश में ऐसी घटनाओं पर अक्सर पर्दा डाल दिया जाता है।

यह कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले 40 दिनों में कम से कम 10 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है, और कुल मिलाकर दिसंबर 2025 से अब तक 18 से ज्यादा अल्पसंख्यक मौत के घाट उतारे जा चुके हैं। उदाहरण के तौर पर, 18 दिसंबर 2025 को दीपू चंद्र दास को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और फिर ईशनिंदा के आरोप में जला दिया। हाल ही में, जनवरी 2026 में ही कई घटनाएं हुईं: नरसिंदी में मुनी चक्रवर्ती को गोली मार दी गई, चट्टोग्राम में एक हिंदू घर पर हमला, नवगांव में मिथुन सरकार का शव तालाब से बरामद। एक हिंदू विधवा को सामूहिक बलात्कार के बाद सिगरेट से जलाया गया, एक पत्रकार राणा प्रताप को गोली मारी गई, और कई जगहों पर हिंदुओं की संपत्ति लूटी गई या जला दी गई। यहां तक कि अंतिम संस्कार को रोकने की घटनाएं हो रही हैं।

अब सवाल यह है कि क्यों हो रहा है यह सब? मेरे अनुभव से, इसका सीधा संबंध इस्लामिक कट्टरपंथ से है। बांग्लादेश में, जहां इस्लाम राज्य धर्म है, कट्टरपंथी तत्व हिंदुओं को ‘काफिर’ मानकर निशाना बनाते हैं। यह सिलसिला भारत-विरोधी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद तेज हुआ, लेकिन जड़ें गहरी हैं। इस्लाम की कुछ व्याख्याएं, जैसे जिहाद और गैर-मुस्लिमों के प्रति असहिष्णुता, इन हमलों को ईंधन देती हैं। मैंने कुरान और हदीस पढ़ी हैं – वहां ऐसी आयतें हैं जो कट्टरपंथियों को प्रेरित करती हैं, जैसे सुरा 9:5 जो ‘मुश्रिकों’ (बहुदेववादियों) को मारने की बात करती है। बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन और स्थानीय मस्जिदों से निकलने वाले फतवे इस हिंसा को बढ़ावा देते हैं। चुनाव नजदीक हैं (फरवरी 2026), और राजनीतिक पार्टियां वोट बैंक के लिए कट्टरपंथियों को शह देती हैं, जिससे हिंदू समुदाय और असुरक्षित हो जाता है। https://www.sudarshannews.in/another-Hindu-man-murdered-in-Bangladesh-young-man-sleeping-inside-garage-was-burnedalive-136736-newsdetails.aspx

मैं पूछता हूं – क्या यह इस्लाम का असली चेहरा है? नहीं, सभी मुसलमान ऐसे नहीं हैं, लेकिन जब बहुसंख्यक चुप रहते हैं या समर्थन करते हैं, तो यह समस्या बन जाती है। मैंने इस्लाम छोड़ा क्योंकि मैंने देखा कि यह सुधार की गुंजाइश नहीं रखता; यह असहिष्णुता को बढ़ावा देता है। दुनिया के मानवाधिकार संगठन, जैसे संयुक्त राष्ट्र, कहां हैं? भारत को चुप क्यों रहना चाहिए? बांग्लादेशी हिंदुओं की आवाज दबाई जा रही है, और मुख्यधारा मीडिया इसे नजरअंदाज कर रहा है।

 

दोस्तों, अगर हम चुप रहे, तो यह हिंसा रुकेगी नहीं। सोशल मीडिया पर आवाज उठाएं, अपने नेताओं से बात करें। चंचल जैसे निर्दोषों की मौत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। इस्लामिक कट्टरपंथ की आलोचना जरूरी है, ताकि सुधार हो सके। मेरे ब्लॉग पर आपके विचारों का स्वागत है – क्या आप सहमत हैं?

 

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